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Friday, August 29, 2025


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अमेरिकी टैरिफ विवाद के बीच जापान रवाना हुए पीएम मोदी, कहा- रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी पर होगा फोकस

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को जापान और चीन के पांच दिवसीय दौरे रवाना हो गए। पीएम मोदी के दौरे का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करना है। अमेरिकी टैरिफ विवाद के बीच हो रही पीएम मोदी की यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण समझी जा रही है। पीएम मोदी जापान के बाद चीन जाएंगे। जहां वह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान उनकी मुलाकात कई देशों के प्रमुख से होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के निमंत्रण पर मैं 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए जापान की दो दिवसीय यात्रा पर जा रहा हूं। हम इस यात्रा के दौरान अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के अगले चरण को आकार देने पर ध्यान देंगे। हमारी रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी ने पिछले 11 वर्षों में निरंतर और महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि हम अपने सहयोग को नई ऊंचाई पर पहुंचाने, आर्थिक और निवेश संबंधों के दायरे तथा महत्वाकांक्षाओं का विस्तार करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं सेमीकंडक्टर समेत नई और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। यह यात्रा हमारे सभ्यतागत बंधनों और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने का भी अवसर होगी जो हमारे लोगों को परस्पर जोड़ते हैं।
पीएम ने कहा कि जापान से मैं राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निमंत्रण पर तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन जाऊंगा। भारत एससीओ का सक्रिय और रचनात्मक सदस्य है। अपनी अध्यक्षता के दौरान हमने नवाचार, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में नए विचार पेश किए हैं और सहयोग की पहल की है। उन्होंने कहा कि भारत साझा चुनौतियों का समाधान करने और क्षेत्रीय सहयोग को प्रगाढ़ करने के लिए एससीओ सदस्यों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। मैं शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति शी चिनफिंग, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य नेताओं से मिलने के लिए भी उत्सुक हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि जापान और चीन की ये यात्राएं हमारे राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकताओं को और मजबूत करेंगी तथा क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, सुरक्षा और सतत विकास को आगे बढ़ाने में सार्थक सहयोग स्थापित करेंगी।
पीएम मोदी दो देशों के दौरे के पहले चरण में जापान पहुंचेंगे। यहां वह 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन शिरकत करेंगे। इस दौरे का उद्देश्य भारत-जापान संबंधों को मजबूत करना और वैश्विक शांति पर चर्चा करना है। जापानी पीएम शिगेरू इशिबा से मुलाकात के साथ ही वह उद्योगपतियों और राजनीतिक नेताओं से बातचीत करेंगे। उनके एजेंडे में व्यापार, निवेश, रक्षा, विज्ञान और तकनीक व संस्कृति शामिल हैं। जापान के बाद पीएम मोदी 30 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन में रहेंगे। इस दौरान वह शंघाई सहयोग परिषद (एससीओ) की 25वीं बैठक में हिस्सा लेंगे। सात साल में चीन की अपनी पहली यात्रा के दौरान पीएम दुनिया की कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ नजदीकी बढ़ाकर मेक इन इंडिया पहल के लिए समर्थन जुटाएंगे। जापान, चीन और रूस के समर्थन से भारत को अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जापान यात्रा के बारे में कहा कि यह संबंधों में अधिक लचीलापन लाने तथा उभरते अवसरों और चुनौतियों का सामना करने के लिए कई नई पहल शुरू करने का अवसर होगा। नई दिल्ली का कहना है कि वह भारतीय निर्यात पर ट्रंप के लगाए गए 50 फीसदी तक के टैरिफ के मुद्दे को वार्ता के जरिये सुलझाने में जुटा है। वहीं जापान के शीर्ष व्यापार वार्ताकार ने दोनों देशों के टैरिफ समझौते में आई रुकावट के कारण अमेरिका का दौरा रद्द कर दिया। मोदी का जापान दौरा इस लिहाज से भी काफी अहम है क्योंकि दोनों देश ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के साथ क्वाड समूह का हिस्सा हैं और यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करना चाहता है। अमेरिका से तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद भारत का कहना है कि मोदी और इशिबा क्वाड के अंदर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।
पीएम मोदी जापान के दौरे के बाद शंघाई सहयोग संगठन के दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के लिए चीन पहुंचेंगे। उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों पड़ोसी देश 2020 में सीमा पर हुई हिंसक झड़पों के बाद तनाव कम करने में जुटे हैं। पीएम अपने दौरे में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। चीन और भारत पांच वर्षों के अंतराल के बाद सीधी उड़ानें फिर शुरू करना चाहते हैं तथा तीन हिमालयी क्रॉसिंग पर सीमा व्यापार पुनः खोलने सहित व्यापार बाधाओं को कम करने पर चर्चा कर रहे हैं। भारत निवेश नियमों को आसान बनाने पर भी विचार कर रहा है। इससे चीनी कंपनियों पर अधिक निगरानी रखी जा सकेगी। वहीं बीजिंग ने हाल ही में भारत को उर्वरकों, दुर्लभ खनिजों और सुरंग खोदने वाली मशीनों के निर्यात पर प्रतिबंध हटाने पर सहमति जताई।

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