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Thursday, August 27, 2026


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राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रीय आरोग्य मेला का किया उद्घाटन, औषधीय पौधों को लेकर दिया मैसेज

मुंबई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने औषधीय पौधों के लिए जोरदार समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि इनकी खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करती है बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देती है। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव में राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का उद्घाटन करने के बाद बोलते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कहा कि औषधीय पौधों का बहुमूल्य भंडार न केवल दवाओं के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण है। अच्छे स्वास्थ्य को जीवन की परम खुशी बताते हुए उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक देश को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बीमारियों की रोकथाम व्यक्तियों के लिए फायदेमंद है और देश की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर बोझ को भी कम करती है। आयुष मंत्रालय (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) ने अखिल भारतीय आयुर्वेदिक कांग्रेस के सहयोग से 25 से 28 फरवरी के बीच शेगांव में राष्ट्रीय आरोग्य मेले का आयोजन किया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि उनका जन्म और पालन-पोषण प्रकृति की गोद में हुआ है। वह स्वयं आयुर्वेद को बढ़ावा देती हैं और आयुर्वेदिक जीवनशैली का पालन करती हैं। उन्होंने कहा कि कहा जाता है कि प्रकृति शरीर की सभी जरूरतों का ख्याल रखती है। लेकिन समय बदल गया है और आज हमें दवाओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है क्योंकि जंगल लुप्त होते जा रहे हैं। जंगलों को जलाया जा रहा है और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां और औषधीय पौधे भी खत्म हो रहे हैं।
यहां तक कि आयुर्वेद के शोधकर्ताओं को भी औषधीय पौधे प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। इसलिए आज मुझे लगता है कि न केवल सरकार बल्कि सभी को इस बारे में सोचना चाहिए और बेहतर स्वास्थ्य के लिए औषधीय पौधों के विकास की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने सरकार पर निर्भर हुए बिना औषधीय पौधों की खेती की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने आगे कहा कि हमारे कृषि क्षेत्रों, रसोई घरों और वन क्षेत्रों में औषधीय पौधों और स्वास्थ्यवर्धक जड़ी-बूटियों का एक अनमोल खजाना मौजूद है। इस बहुमूल्य संपदा का संरक्षण और संवर्धन न केवल दवाओं के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी आवश्यक है। औषधीय पौधों की खेती से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य और संरक्षण में भी मदद मिलती है।

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