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Friday, January 16, 2026


मणिपुर में लगा राष्ट्रपति शासन, बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से 9 फरवरी को दिया था इस्तीफा

नई दिल्ली: मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है। राज्य के सीएम एन बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को इस्तीफा दिया था, जिसके बाद राज्यपाल अजय भल्ला ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की। विधानसभा को भी निलंबित कर दिया गया है। बता दें कि मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा के चलते बीरेन सिंह की लगातार आलोचना हो रही थी। जिसके बाद उन्होंने पिछले सप्ताह अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की घोषणा करते हुए गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मानना है कि ‘ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें इस राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चल सकती। अब, संविधान के अनुच्छेद 356 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, मैं घोषणा करती हूं कि मैं भारत के राष्ट्रपति के रूप में मणिपुर राज्य सरकार के सभी कार्यों और इस राज्य के राज्यपाल द्वारा निहित या प्रयोग की जाने वाली सभी शक्तियों को अपने अधीन करती हूं। अधिसूचना में कहा गया है कि विधानसभा को निलंबित कर दिया गया है।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मणिपुर विधानसभा को निलंबित कर दिया गया है, जिसका कार्यकाल 2027 तक है। मणिपुर में भाजपा सरकार का नेतृत्व कर रहे सिंह ने करीब 21 महीने की जातीय हिंसा के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इस हिंसा में अब तक 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। बीरेन सिंह ने नौ फरवरी को यहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के कुछ घंटे बाद इंफाल में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को रिपोर्ट भेजे जाने के बाद राष्ट्रपति शासन लगाने का निर्णय लिया गया।
भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रपति शासन लगाने का निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पार्टी के पूर्वोत्तर प्रभारी संबित पात्रा और पार्टी विधायकों के बीच कई दौर की चर्चा के बावजूद पार्टी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर आम सहमति बनाने में विफल रही।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासल लगाए जाने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू करना भाजपा द्वारा मणिपुर में शासन करने में उसकी पूर्ण अक्षमता की देर से स्वीकारोक्ति है। अब प्रधानमंत्री मोदी मणिपुर के लिए अपनी सीधी जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकते। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री ने अंततः राज्य का दौरा करने और मणिपुर और भारत के लोगों को वहां शांति एवं सामान्य स्थिति बहाल करने की अपनी योजना समझाने का मन बना लिया है?
इससे पहले संबित पात्रा के नेतृत्व में भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राजभवन में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात की थी। 9 फरवरी को हिंसा से प्रभावित राज्य के मुख्यमंत्री पद से एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद नेतृत्व संकट पैदा हो गया है। राज्य विधानसभा के दो लगातार सत्रों के बीच अधिकतम छह महीने के अंतराल की समाप्ति पर एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘देखते हैं क्या होता है।’
इससे पहले आज मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला और अर्धसैनिक बल के अधिकारियों ने आज ही राजभवन में बैठक की थी। इस दौरान अधिकारियों ने उन्हें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की तैनाती और परिचालन गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। बयान में कहा गया कि मणिपुर और नगालैंड सेक्टर के निवर्तमान महानिरीक्षक (सीआरपीएफ) डॉ. विपुल कुमार और नवनियुक्त महानिरीक्षक राजेंद्र नारायण दाश ने राज्यपाल से मुलाकात की। इसमें कहा गया, ‘अधिकारियों ने राज्यपाल को क्षेत्र में सीआरपीएफ की तैनाती और परिचालन गतिविधियों के बारे में जानकारी दी।

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