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Monday, June 15, 2026


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किसानों से जुड़ी 1.01 लाख करोड़ रुपये से अधिक की योजनाएं स्वीकृत; रेल कर्मियों को 78 दिन का बोनस

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने किसानों और इन्फ्रास्ट्र्कचर विकास से जुड़ी कई परियोजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आज इन योजनाओं को मंजूरी दी गई। केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने बताया कि सरकार ने PM राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और कृषि उन्नति योजना को मंजूरी दी है। इन योजनाओं के लिए 1 लाख 1321 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाएगा। इसके अलावा 63 हजार करोड़ रुपये से अधिक की चेन्नई मेट्रो फेज-2 परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के मकसद से सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं।
वैष्णव ने बताया कि एक तरह से किसानों की आय से जुड़े लगभग हर बिंदु को 1,01, 321 करोड़ रुपए के कार्यक्रम के तहत कवर किया गया है। उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ा कार्यक्रम है जिसके कई घटक हैं। सभी घटकों को कैबिनेट ने अलग-अलग योजनाओं के रूप में मंजूरी दी है। बकौल अश्विनी वैष्णव, ‘अगर कोई राज्य किसी एक योजना से जुड़ी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) लेकर आता है, तो उसे इस योजना के तहत मंजूरी दी जाएगी।’ कैबिनेट ने चेन्नई मेट्रो के दूसरे चरण को भी स्वीकृति दी है। इस पर 63,246 करोड़ रुपये की लागत आएगी। दूसरे चरण की कुल लंबाई 119 किलोमीटर होगी। साथ ही कुल 120 स्टेशन होंगे। इस परियोजना में केंद्र और तमिलनाडु सरकार की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी होगी। इसका निर्माण चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड करेगी। चेन्नई में 2026 में 1.26 करोड़ और 2048 में 1.80 करोड़ जनसंख्या होने का अनुमान है।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट बैठक में सबसे बड़ा फैसला किसानों की आय बढ़ाने और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का है। इसके लिए ‘पीएम राष्ट्र कृषि विकास योजना’ (PM Rashtra Krishi Vikas Yojana) और ‘कृषोन्ति योजना’ (Krishonnati Yojana) को मंजूरी दी गई है। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट ने कृषि मंत्रालय के तहत संचालित सभी केंद्र प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) को दो व्यापक योजनाओं में तर्कसंगत बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। पीएम-आरकेवीवाई टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देगा जबकि केवाई खाद्य सुरक्षा और कृषि आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने में सहायता करेगा।
उन्होंने बताया कि दोनों योजनाओं के तहत 9 अलग-अलग योजनाएं हैं। विभिन्न घटकों के कुशल और प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सभी घटक प्रौद्योगिकी का लाभ उठाएंगे। ये दोनों योजनाएं राज्यों की ओर से कार्यान्वित की जाती हैं। 1,01,321.61 करोड़ रुपये के कुल प्रस्तावित व्यय में से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के केंद्रीय हिस्से का अनुमानित व्यय 69,088.98 करोड़ रुपये है। साथ ही इसमें राज्यों का हिस्सा 32,232.63 करोड़ रुपये है। इसमें कृषि विकास योजना के लिए 57,074.72 करोड़ रुपये और कृषोन्नति योजना के लिए 44,246.89 करोड़ रुपये शामिल हैं।
केंद्रीय कैबिनेट ने लाखों रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन के बराबर बोनस देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। त्योहारी सत्र से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को कैबिनेट की अहम बैठक में रेलवे कर्मचारियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 78 दिनों के लिए उत्पादकता से जुड़े बोनस (पीएलबी) को मंजूरी दी। इसका लाभ 11,72,240 रेलवे कर्मचारियों को होगा। इस पर 2028.57 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पात्र रेलवे कर्मचारियों को देय अधिकतम राशि 78 दिनों के लिए 17,951 रुपये है। इस राशि का भुगतान विभिन्न श्रेणियों के रेलवे कर्मचारियों जैसे ट्रैक मेंटेनर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर (गार्ड), स्टेशन मास्टर, पर्यवेक्षक, तकनीशियन, तकनीशियन हेल्पर, पॉइंट्समैन, मंत्रालयिक कर्मचारी और अन्य ग्रुप सी कर्मचारियों को किया जाएगा। पात्र रेलवे कर्मचारियों को पीएलबी का भुगतान प्रत्येक वर्ष दुर्गा पूजा/दशहरा की छुट्टियों से पहले किया जाता है। वर्ष 2023-2024 में रेलवे का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा। रेलवे ने 1588 मिलियन टन का रिकॉर्ड माल लोड किया और लगभग 670 करोड़ यात्रियों को सफर कराया।
कैबिनेट ने 10,103 करोड़ रुपये की खाद्य तेल पर राष्ट्रीय मिशन ऑयलसीड्स को भी मंजूरी दी है। यह कृषोन्नति योजना के तहत आने वाली नौ योजनाओं में से एक है। इस योजना का लक्ष्य 2031 तक खाद्य तेलों का उत्पादन 1.27 करोड़ टन से बढ़ाकर 2 करोड़ टन करना है। इस मिशन का लक्ष्य तिलहन उत्पादन में भारत को सात वर्षों में आत्मनिर्भर बनाना है। मिशन साथी पोर्टल लॉन्च करेगा जिससे राज्य गुणवत्तापूर्ण बीजों की समय पर उपलब्धता के लिए हितधारकों के साथ समन्वय कर सकेंगे
कैबिनेट ने लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी दे दी है ताकि भारत ऊर्जा दक्षता केंद्र में शामिल हो सके। यह दुनिया भर में ऊर्जा दक्षता और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक वैश्विक मंच है। यह कदम सतत विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के उसके प्रयासों के अनुरूप है। इस निर्णय से भारत को विशिष्ट 16 देशों के समूह की साझा रणनीतिक ऊर्जा प्रथाओं और नवीन समाधानों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

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