27.2 C
Dehradun
Monday, August 24, 2026


spot_img

‘बिहार में हुई SIR की प्रक्रिया वोटर-फ्रेंडली’, सुप्रीम कोर्ट ने 11 दस्तावेजों को बताया मतदाता हितैषी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बिहार मतदाता सूची विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया में पहचान साबित करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा तय 11 दस्तावेजों की सूची को मतदाता हितैषी बताते हुए इस प्रक्रिया को मतदाताओं के अनुकूल कहा। याचिकाकर्ताओं की ओर से 11 दस्तावेजों पर सवाल उठाए जाने और बहुत कम जनसंख्या के पास इनके होने की दलीलों पर शीर्ष अदालत ने कहा कि मतदाता सूची के संक्षिप्त पुनरीक्षण में तय सात दस्तावेजों के बजाए एसआइआर में पहचान साबित करने के लिए तय 11 दस्तावेज दर्शाते हैं कि यह प्रक्रिया मतदाताओं के ज्यादा अनुकूल है।
कोर्ट ने प्रारूप मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाने के चुनाव आयोग के अधिकार पर सवाल खड़ा करने और लोगों के मतदान के अधिकार की दलील पर कहा कि यह विवाद संवैधानिक अधिकार और संवैधानिक पात्रता का है। मामले में गुरुवार को भी बहस जारी रहेगी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बाग्ची की पीठ एसआइआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। गैर सरकारी संगठन एडीआर और कई विपक्षी दलों के नेताओं ने एसआइआर को चुनौती दी है।
बुधवार को एडीआर के वकील प्रशांत भूषण ने मतदाता सूची में नहीं शामिल किये गए 65 लाख लोगों के नाम और कारण वेबसाइट पर डालने का भी अंतरिम आदेश मांगा। वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने पहचान साबित करने के लिए तय 11 दस्तावेजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में ज्यादातर जनसंख्या के पास ये दस्तावेज नहीं हैं।
आधार को न स्वीकार करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि ज्यादातर आबादी के पास आधार है और इसे न स्वीकार किया जाना लोगों को बाहर कर देगा। उनकी दलीलों पर पीठ ने कहा कि संक्षिप्त पुनरीक्षण में सात दस्तावेज तय थे और एसआइआर में बढ़ा कर 11 कर दिया गया है जो दर्शाता है कि प्रक्रिया मतदाताओं के ज्यादा अनुकूल है। हम आपकी ये दलील मानते हैं कि आधार स्वीकार न करना बाहर करने वाला है लेकिन दस्तावेजों की संख्या बढ़ाए जाने से वास्तव में प्रक्रिया समावेशी बनती है न कि बाहर करने वाली।
हालांकि सिंघवी ने असहमति जताते हुए कहा कि भले ही दस्तावेजों की संख्या ज्यादा हो लेकिन बिहार की जनसंख्या के पास उनकी उपलब्धता देखी जाए तो कवरेज बहुत कम है। कोर्ट ने कहा कि अगर चुनाव आयोग सभी 11 दस्तावेज मांगता तो यह मतदाता विरोधी होती लेकिन उनमें से कोई एक मांगना ऐसा नहीं है। बात पासपोर्ट और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों पर भी हुई और जब सिंघवी ने कहा कि बहुत कम जनसंख्या के पास ये दस्तावेज हैं।
पीठ ने कहा कि हमें बिहार को इस तरह पेश नहीं करना चाहिए। ऑल इंडिया सर्विसेज में सबसे अधिक अभ्यर्थी इसी राज्य के होते हैं। राज्य में 36 लाख पासपोर्ट धारकों का कवरेज अच्छा प्रतीत होता है। वकील गोपाल शंकर नारायण ने पहचान के 11 दस्तावेजों और जारी नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग को इसका अधिकार ही नहीं है।
मनमाने ढंग से 2003 की कटऑफ तय कर दी। पीठ ने कहा कि यह दलील मानी जाए तो आयोग कहीं भी ये प्रक्रिया नहीं कर सकता। शंकरनारयण का कहना था कि रिवीजन तय प्रकिया से होना चाहिए और ये प्रक्रिया गैरकानूनी है। क्योंक मतदाता को हटाने की प्रक्रिया तय है उसका पालन किये बगैर बड़ी संख्या में लोग हटाए जा रहे हैं।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

ब्रिक्स खेल मंत्रियों की बैठक में संयुक्त घोषणा पत्र सर्वसम्मति से स्वीकार

0
नई दिल्ली।  ब्रिक्‍स खेल मंत्रियों की बैठक का समापन आज आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में हो गया। इसमें ब्रिक्‍स खेल संयुक्‍त घोषणा पत्र सर्वसम्‍मति...

नाथूला दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा संपन्न, 464 श्रद्धालु हुए शामिल

0
नई दिल्ली। सिक्क्मि के नाथूला दर्रे के रास्‍ते से होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा आज संपन्‍न हो गई। इसके माध्‍यम से 464 तीर्थ यात्रियों...

प्रधानमंत्री मोदी ने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र से नवाचार की वैश्विक छवि बनाने का आग्रह...

0
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप्स ने सरकार में अपना विश्वास व्यक्त किया है। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र...

आईसीएआर महानिदेशक ने मृदा डेटाबेस को कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया

0
नई दिल्ली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण और भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो द्वारा...

गृह मंत्री अमित शाह राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में भाग लेंगे

0
नई दिल्ली।  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कल नई दिल्ली में आयोजित होने वाले नौवें राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में भाग लेंगे। दो दिवसीय यह...