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Monday, March 23, 2026


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डिजिटल इकोनॉमी में 2 साल के अंदर इतने लोगों को मिलेगी नौकरियां, जानें सरकार ने कितना है टारगेट…

Digital Economy Jobs: भारत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ी तेजी से विकास कर रहा है। आज स्थिति ये है कि भारत प्रौद्योगिकी उपभोक्ता से प्रौद्योगिकी जनक बनता जा रहा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को एक स्टार्ट-अप कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में ये बात कही। उन्होंने कहा कि भारत उपभोक्तावाद वाली सोच से ऊपर उठकर विकास की ओर बढ़ रहा है। संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी है कि डिजिटल इकोनॉमी में 2 साल के अंदर 1 करोड़ लोगों को नौकरियां देने का टारगेट रखा है, जिसे लेकर बड़ी तेजी के साथ काम किया जा रहा है।

संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 30 नवंबर को भारतीय सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (STPI) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंप्यूटर सॉफ्टवेयर निर्यात संवर्धन समिति (ईएससी) द्वारा आयोजित स्टार्ट-अप पहल का उद्घाटन किया। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्टार्टअप कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के 3 बड़े स्तंभ इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग, आईटी तथा आईटी संबद्ध क्षेत्र और स्टार्टअप हैं। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि अकेला इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र 2.5 – 3 मिलियन के बीच अतिरिक्त रोजगार सृजित कर सकता है और बीपीओ क्षेत्र आने वाले दो वर्षों में 8 मिलियन नौकरियां उपलब्ध करा सकता है, जो रोजगार के मौजूदा स्तर में पर्याप्त वृद्धि होगी।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि जापान, जर्मनी और फ्रांस आदि देशों में दुनिया के सबसे बेहतरीन ट्रेनें थीं। भारत में उस तरह के ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत में भी प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई। पीएम मोदी ने अपने देश के इंजीनियरों, विशेषज्ञों से कहा कि वे विश्व स्तर की ट्रेन का निर्माण भारत में करें। जिसके बाद भारत में वंदेभारत जैसी ट्रेन का निर्माण हुआ। इस दौरान उन्होंने प्रोद्योगिकी के क्षेत्र के विकास के लिए जोर देते हुए कहा कि आज भारत पहले से ज्यादा मंजबूत और आत्म निर्भर बन रहा है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था में दो साल में 1 करोड़ से ज्यादा होंगी नौकरियां

केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, पीएम मोदी ने डिजिटल अर्थव्यवस्था के 3 क्षेत्रों यानि इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टार्टअप और आईटी तथा आईटी संबद्ध सेवाओं में अगले 2 साल में रोजगार का आंकड़ा 1 करोड़ के पार ले जाने का टारगेट रखा है। उन्होंने कहा कि पिछले आठ सालों में देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम ने वास्तविक विकास यात्रा की है। इस यात्रा के दौरान भारत प्रौद्योगिकी उपभोक्ता के विचार से ऊपर उठा है। आज भारत प्रौद्योगिकी उपभोक्ता से प्रौद्योगिकी जनक बन रहा है।

उन्होंने कहा, पहले स्टार्टअप के लिए कुछ शहरों का जिक्र होता था। अब जब मैं गांवों में स्कूल जाता हूं तो वहां के बच्चे स्टार्टअप लगाना चाहते हैं। यह बदलाव आया है। भारत अब प्रौद्योगिकी उपभोक्ता से प्रौद्योगिकी निर्माता बन रहा है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया स्टार्टअप के लिए तमाम सुविधाएं मुहैया करा रहा है।

गांवों में बढ़े स्टार्ट-अप

केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आने वाले समय में स्टार्टअप का केंद्र गांव होंगे और अगले कुछ बड़े स्टार्टअप ग्रामीण इलाकों से निकलेंगे। उन्होने कहा कि स्टार्टअप को लेकर यह एक बड़ा बदलाव आया है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा, पहले स्टार्टअप के लिये कुछ शहरों का जिक्र होता था, लेकिन अब जब मैं गांवों में स्कूल जाता हूं, वहां के बच्चे स्टार्टअप लगाना चाहते हैं। गांवों में यह बदलाव आया है। मंत्री ने कहा कि भारत अब प्रौद्योगिकी उपभोक्ता से प्रौद्योगिकी का जनक बन रहा है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया (STPI) स्टार्टअप को मंच प्रदान करने के लिये कई सुविधाएं तैयार कर रही है।

इंफ्रास्ट्रक्चर हो रहें तैयार

केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अगला महत्व विनिर्माण खंड का है, जिसमें आश्चर्यजनक संख्या में नवाचार देखे जा रहे हैं, विशेष रूप से मोबाइल टेलीफोन प्रणाली में, जहां भारत कुछ वर्ष पहले तक शुद्ध आयातक के मुकाबले अब एक प्रमुख निर्यातक बन गया है। स्टार्टअप के लिए 64 मझोले और छोटे शहरों (टियर दो और टियर तीन) में हर तरह की सुविधाओं से युक्त इंफ्रास्ट्रक्चर (प्लग-एंड-प्ले) प्रदान किये है। स्टार्टअप को 5 से 10 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी लोन के तहत मिलती है। मंत्रालय ने 2025 तक 300 स्टार्टअप को फंड देने का टारगेट रखा गया है। जिनका देश में स्टार्ट-अप के प्रसार पर उल्लेखनीय प्रभाव पड़ेगा।

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