देहरादून। केंद्रीय रेल मंत्री बुधवार को एक दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया और उसके बाद देवप्रयाग और जानसू के बीच बन रही जानसू टनल का भी दौरा किया, जिसका बुधवार को ही ब्रेकथ्रू हुआ। इस दौरान उन्होंने रेलवे अधिकारीयों को उचित दिशा निर्देश भी दिए। देवप्रयाग और जनासू के बीच ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना के अंतर्गत बन रही सबसे लंबी 14.57 किमी की टी-8 और टी-8एम डबल ट्यूब सुरंगों का ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनासू रेलवे स्टेशन पहुंचकर सुरंग निर्माण कार्य का अवलोकन किया। इस मौके पर गढ़वाल सांसद श्री अनिल बलूनी और राज्य के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत भी मौजूद रहे।
14.57 किलोमीटर लंबी इन सुरंगों का निर्माण अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) की मदद से किया गया है, जो परियोजना की तकनीकी दक्षता को दर्शाता है। वहीं, परियोजना की शेष सुरंगों का निर्माण पारंपरिक ड्रिल एंड ब्लास्ट तकनीक से किया जा रहा है। क्षेत्र की जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों को देखते हुए सुरंगों की खुदाई के लिए विशेष टीबीएम मशीनें जर्मनी से मंगाई गई थीं। इसके अलावा जनासू से लगभग 1.5 किलोमीटर दूर एक वर्टिकल शाफ्ट (कुआंनुमा सुरंग) भी बनाई गई है, जिससे खुदाई और निर्माण कार्य में सहायता मिल सके।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सुरंग निर्माण कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यह परियोजना उत्तराखंड के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की आधुनिक तकनीक से सुरंग निर्माण भविष्य की परियोजनाओं के लिए मिसाल बनेगा। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री श्री वैष्णव ने जानकारी देते हुए बताया कि आज का दिन इसलिए भी ऐतिहासिक है क्यूंकि आज ही के दिन भारत में 1853 को पहली रेल बोरीबंदर से ठाणे के बीच चली थी और आज ही भारत की सबसे लम्बी ट्रांसपोर्टेशन टनल जानसू टनल का ब्रेकथ्रू भी हुआ है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहाड़ पर रेल लाने का जो सपना था, वह अब साकार होता नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ महीनों में यह सुरंग पूरी तरह से तैयार हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने सुरंग निर्माण में लगे सभी इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और श्रमिकों को इस ब्रेकथ्रू के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इसे तकनीकी प्रगति, परिश्रम और सामूहिक प्रयासों का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि आने वाले समय में प्रदेश के लिए विकास और कनेक्टिविटी के नए रास्ते खोलेगी।
जानसू रेल टनल का ब्रेकथ ऐतिहासिकः केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव
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