29.3 C
Dehradun
Wednesday, July 1, 2026


spot_img

मुख्यमंत्री ने नॉर्थ जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में किया प्रतिभाग

देहरादून। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली के तत्वाधान में उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल द्वारा देहरादून में आयोजित दो दिवसीय नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आज दिनांक 12 अप्रैल को भव्य समापन हुआ। इस सम्मेलन के समापन के अवसर पर  राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि), भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं नालसा के संरक्षक-प्रधान न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल सहित उच्चतम न्यायालय एवं उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्तिगण, उत्तर भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों से पधारे माननीय न्यायमूर्तिगण और विधि विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री मनोज कुमार गुप्ता द्वारा स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया गया तथा विभिन्न गणमान्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
सम्मेलन में उत्तराखण्ड राज्य के समस्त जनपदों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष, सचिव एवं न्यायिक अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की। विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से न्याय तक पहुँच को सशक्त बनाने, वंचित वर्गों के अधिकारों के संरक्षण तथा न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
सम्मेलन के दौरान वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन, जेल सुधार, विचाराधीन बंदियों के अधिकार, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास एवं महिलाओं व बच्चों के विधिक अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा “न्याय मित्र पोर्टल” का शुभारंभ किया गया, जिससे आमजन ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर त्वरित न्याय प्राप्त कर सकेंगे। नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ द्वारा ई-बुकलेट का विमोचन भी किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने  अपने संबोधन में कहा कि न्याय व्यवस्था की वास्तविक सफलता तभी सुनिश्चित होती है, जब न्याय समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचे। उन्होंने “जस्टिस बियॉन्ड बैरियर्स” की अवधारणा को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि न्याय प्राप्ति की प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ उससे जुड़ी सभी बाधाओं को दूर करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन के विषय को अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए कहा कि आदिवासी समुदायों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा तथा कारागार सुधार जैसे विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ई-कोर्ट्स, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, फास्ट ट्रैक कोर्ट्स और डिजिटल केस मैनेजमेंट जैसे सुधारों से न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा  कि राज्य सरकार भी डिजिटल कोर्ट्स, ई-फाइलिंग, वर्चुअल हियरिंग तथा समान नागरिक संहिता लागू कर न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन से प्राप्त सुझाव प्रदेश एवं देश के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा तीर्थ में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों से की बातचीत

0
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने नई दिल्ली के सेवा तीर्थ में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों से बातचीत की। चर्चा दो प्रमुख विषयों पर...

अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान, तीर्थ यात्रियों के ठहरने के...

0
नई दिल्ली।  वार्षिक अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के साथ 55 हजार तीर्थ यात्रियों के ठहरने के लिए व्यापक...

VB-G RAM G अधिनियम, कल से पूरे ग्रामीण भारत में होगा लागू

0
नई दिल्ली। विकसित भारत – गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) – वीबी जी-राम-जी अधिनियम, 2025 कल से पूरे ग्रामीण भारत में लागू हो...

मंत्री का नगर पालिका में छापा, गायब मिले कई अधिकारी व कर्मचारी

0
उधमसिंहनगर। कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने जसपुर नगर पालिका परिषद में छापा मारा। छापे के दौरान कई अधिकारी और कर्मचारी अनुपस्थित मिले, जबकि...

ऋषिकेश में एमडीडीए का बुलडोजर एक्शन, भू-माफियाओं पर बड़ा प्रहार, पांच ठिकानों पर सीलिंग-ध्वस्तीकरण

0
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माण और भू-माफियाओं के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम देते...