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Monday, March 16, 2026


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मराठा आरक्षण पर सरकार ने मानी जरांगे की आठ में से छह मांग, कुनबी प्रमाणपत्र के लिए बनेगी समिति

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने हैदराबाद गजट के आधार पर मराठाओं को कुनबी प्रमाणपत्र देने के लिए जीआर जारी किया है। इसके तहत गांव-स्तरीय समितियां बनाई जाएंगी, जो दस्तावेजों की जांच कर योग्य आवेदकों को प्रमाणपत्र देंगी। मनोज जरांगे के आंदोलन के बाद बना यह फैसला मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में आरक्षण दिलाने का रास्ता साफ करता है।
मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर महाराष्ट्र सरकार और आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल के बीच बड़ी सहमति बनी है। सरकार ने जरांगे की आठ में से छह मांगों को स्वीकार कर लिया है। इनमें मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया तेज करना, गांव स्तर पर समिति बनाकर पुराने दस्तावेजों की जांच, 1961 से पहले के भूमि अभिलेख उपलब्ध कराना और पात्रों को ओबीसी में आरक्षण का लाभ देना शामिल है। सरकार के जीआर जारी करने के बाद जरांगे ने इसे बड़ी जीत बताया।
जीआर जारी करने के साथ ही सरकार ने मराठा समुदाय को कुनबी जाति प्रमाणपत्र दिलाने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए गांव-स्तरीय समितियां गठित करने की घोषणा की। यह फैसला मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल से हुई बातचीत के बाद लिया गया। सरकारी प्रस्ताव सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग ने जारी किया। इसमें कहा गया है कि हैदराबाद गजट में दर्ज ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर मराठाओं के दावे की जांच की जाएगी। यदि दस्तावेजों में किसी मराठा परिवार को कुनबी बताया गया है, तो उसे कुनबी प्रमाणपत्र देकर ओबीसी आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।
मनोज जरांगे लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि मराठा समुदाय को कुनबी के तौर पर मान्यता दी जाए। कुनबी समुदाय महाराष्ट्र में ओबीसी श्रेणी में आता है और इस श्रेणी में आने से मराठाओं को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण मिल सकेगा। जरांगे ने मुंबई के आजाद मैदान में पांच दिन तक अनशन किया, जिसके बाद सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनी।
मनोज जरांगे की आठ प्रमुख मांगें
सभी मराठा समाज के लोगों को सरलता से कुनबी प्रमाणपत्र (सगे-सोयरे कुनबी प्रमाणपत्र) उपलब्ध कराया जाए।
हैदराबाद, सतारा और औंध गजट को तुरंत लागू किया जाए।
मराठा आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं पर दर्ज सभी आपराधिक मामले वापस लिए जाएं।
आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिजनों को तत्काल आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी दी जाए।
58 लाख से अधिक कुनबी नोंदी ग्राम पंचायत स्तर पर सार्वजनिक की जाएं, ताकि मराठा समाज की पहचान स्पष्ट हो।
वंशवली (शिंदे) समिति को स्वतंत्र कार्यालय और अतिरिक्त समय दिया जाए।
सरकार मराठा-कुनबी एक का आधिकारिक आदेश (जीआर) जारी करे।
सगे-सोयरे प्रमाणपत्र की सत्यापन और मान्यता प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।
सरकार ने जो छह मांगें स्वीकार की
हैदराबाद गजट लागू करने का निर्णय लिया गया।
सातारा और औंध गजट को लागू करने की प्रक्रिया शुरू, 15 दिनों में कानूनी दिक्कतें दूर होंगी।
आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने का आश्वासन।
आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिजनों को 15 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद और योग्यता अनुसार नौकरी।**
58 लाख कुनबी नोंदी पंचायत स्तर पर सार्वजनिक की जाएगी।
वंशवली (शिंदे) समिति को कार्यालय और कार्यकाल विस्तार मिलेगा।
मराठा-कुनबी एक का जीआर अभी प्रक्रिया में है, लेकिन लागू नहीं हुआ।
सगे-सोयरे प्रमाणपत्र की जांच की प्रक्रिया शुरू है, पर अंतिम फैसला लंबित है।
जीआर में कहा गया है कि हर गांव में ग्राम सेवक, तलाठी और सहायक कृषि अधिकारी की समिति बनाई जाएगी। यह समिति आवेदकों के दस्तावेजों की जांच करेगी और योग्य पाए जाने वालों की रिपोर्ट संबंधित प्राधिकरण को सौंपेगी। समिति का काम समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से करना होगा ताकि पात्र मराठाओं को कुनबी प्रमाणपत्र मिल सके।
सरकार ने साफ किया है कि प्रमाणपत्र पाने के लिए आवेदकों को यह साबित करना होगा कि उनके परिवार या पूर्वजों के पास 21 नवंबर 1961 से पहले कृषि भूमि थी। इसके लिए पुराने राजस्व अभिलेख, भूमि रजिस्टर या अन्य सरकारी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इन दस्तावेजों की जांच गांव-स्तरीय समिति करेगी और पात्रता तय करेगी।
महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2023 में जाति प्रमाणपत्र नियमों में संशोधन कर पुराने दस्तावेजों को मान्य किया था। इसके बाद जुलाई 2024 में एक और जीआर जारी कर विभागों को पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया था। मंगलवार का जीआर इन्हीं फैसलों को आगे बढ़ाते हुए मराठा समुदाय के लिए एक स्थायी ढांचा तैयार करता है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठा आरक्षण आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि मनोज जरांगे का अनशन समाप्त हो गया है। उन्होंने कैबिनेट उपसमिति और दोनों डिप्टी सीएम, एकनाथ शिंदे व अजित पवार के प्रयासों की सराहना की। फडणवीस ने बताया कि आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग हैदराबाद गजट लागू करने की थी, जिसे सरकार ने मान लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण किसी समूह को नहीं, बल्कि पात्र व्यक्ति को मिलता है। यदि किसी मराठा समाज के पूर्वज का नाम हैदराबाद गजट में कुनबी के रूप में दर्ज है, तो वही दस्तावेज उनके लिए प्रमाण बनेगा और उन्हें ओबीसी श्रेणी का लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने आंदोलन के दौरान मुंबईकरों को हुई परेशानियों पर खेद जताया और समाधान तक पहुंचने में सहयोग के लिए कैबिनेट उप-समिति, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजीत पवार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि मराठा और ओबीसी समाज के बीच कोई टकराव न हो और दोनों समुदायों के हित सुरक्षित रहें। उन्होंने दोहराया कि यह फैसला संवैधानिक रूप से टिकाऊ है और अदालत में भी कायम रह सकेगा।
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को बल देने वाला सबसे अहम दस्तावेज है 1918 का हैदराबाद गजट। निजाम शासनकाल में जारी इस आदेश में मराठवाड़ा क्षेत्र के कई मराठा समुदायों को कुनबी के तौर पर दर्ज किया गया था। कुनबी महाराष्ट्र में ओबीसी वर्ग के तहत मान्य हैं और आरक्षण का लाभ पाते हैं। गजट के अनुसार, मराठों को उस दौर में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा मानकर शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण का लाभ दिया गया था।
यह दस्तावेज आज भी वैध माना जाता है और कई कानूनी मामलों में संदर्भ के रूप में पेश किया जाता है। यही कारण है कि मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल इसकी तत्काल लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर हैदराबाद गजट को सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के जरिए लागू किया गया, तो मराठों को सीधे कुनबी दर्जा मिल सकेगा।
जीआर का सीधा असर यह होगा कि मराठवाड़ा क्षेत्र के मराठाओं को कुनबी प्रमाणपत्र मिलने लगेगा। इससे वे ओबीसी के तहत आरक्षण के हकदार हो जाएंगे। यह फैसला राज्य में चल रहे मराठा आरक्षण आंदोलन के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

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