29.7 C
Dehradun
Thursday, March 26, 2026


spot_img

कर्नाटक विधानसभा ने वीबी-जी राम जी के खिलाफ पारित किया प्रस्ताव, मनरेगा को बहाल करने की मांग

बंगलूरू। कर्नाटक विधानसभा ने केंद्र सरकार से वीबी-जी राम जी कानून रद्द कर मनरेगा को बहाल करने की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया, जबकि विपक्षी भाजपा और जद (एस) ने वॉकआउट किया। भाजपा ने प्रस्ताव का विरोध किया और आबकारी मंत्री तिम्मापुर के इस्तीफे की मांग की, लेकिन कांग्रेस ने यह मांग खारिज कर दी। कर्नाटक विधानसभा ने बुधवार को एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र सरकार से तत्काल वीबी-जी राम जी को रद्द करने और मनरेगा को बहाल करने की अपील की गई। इस दौरान विपक्षी भाजपा और उसकी सहयोगी जद (एस) ने वॉकआउट किया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार को यह प्रस्ताव पेश किया था, जिसे आज सदन ने स्वीकार किया। प्रस्ताव में कहा गया कि केंद्र की ओर से एकतरफा लागू किया गया वीबी-जी राम जी कानून संघीय सिद्धांतों और ग्रामीण लोगों के आजीविका के अधिकार के खिलाफ है।
विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा कि भाजपा इस प्रस्ताव का विरोध करती है और विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (वीबी-जी राम जी) का समर्थन करती है। उन्होंने यह भी दोहराया कि आबकारी मंत्री आरबी तिम्मापुर को इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि आबकारी विभाग में कथित तौर पर करीब छह करोड़ का भ्रष्टाचार हुआ है।
विपक्षी पार्टी ने कर्नाटक विधानसभा में रातभर हंगामा किया, जो बुधवार तक जारी रहा। पार्टी ने विधानसभा में नारेबाजी करते हुए कार्यवाही में बाधा डाली और तिम्मापुर के इस्तीफे की मांग की। वहीं, सत्तारूढ़ कांग्रेस ने विपक्ष की मांग को खारिज किया। कांग्रेस ने कहा कि तिम्मापुर के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। वीबी-जी राम जी पर प्रस्ताव पारित होने के बाद स्पीकर यूटी खादर ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए के लिए स्थगित कर दिया।
पहले ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री रह चुके प्रियांक खरगे ने कहा कि मनरेगा रोजगार सृजित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका हासिल करने में मदद करने वाला खेल बदलने वाला (गेम चेंजर) कार्यक्रम था। उन्होंने कहा कि मनरेगा मांग-आधारित है, जबकि वीबी-जी राम जी आपूर्ति-आधारित है और यह पिछली रोजगार योजना की तरह रोजगार की गारंटी नहीं देता।
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया और कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र कनकपुरा में कई विकास कार्य मनरेगा के कारण शुरू हुए। विजयपुरा विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने वीबी-जी राम जी का समर्थन किया और कहा कि यह कानून बहुत जरूरी था। पाटिल को भाजपा से निष्कासित कर चुकी है।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रस्ताव में कहा कि वीबी-जी राम जी संघीय सिद्धांतों के खिलाफ है, राज्य को भारी वित्तीय बोझ डालता है और ग्राम पंचायतों के अधिकार छीनता है। मनरेगा को उसके मूल रूप में बहाल किया जाना चाहिए, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका प्राप्त करने और गरीबों की आत्मनिर्भरता में मदद की। प्रस्ताव में आगे कहा गया कि यह सदन मनरेगा के रद्द होने को गंभीरता से देखता है, जो ग्रामीण गरीबों के लिए संजीवनी थी और ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा थी। यह सदन केंद्र के इस कदम का कड़ा विरोध करता है।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

खाड़ी देशों ने की ईरान से बगावत! तेहरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका का...

0
नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का आज 26वां दिन है। इस युद्ध में ईरान ने अमेरिका से बदला लेने के लिए...

जनजातीय समुदायों का योगदान हर युग में महत्वपूर्ण रहा: केन्द्रीय राज्य मंत्री दुर्गा दास

0
नई दिल्ली: जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके ने कहा कि जनजातीय समुदायों का योगदान हर युग में महत्वपूर्ण रहा है और...

पश्चिम एशिया की स्थिति पर संसद परिसर में हुई सर्वदलीय बैठक

0
नई दिल्ली: सरकार ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में पश्चिम एशिया की स्थिति पर सर्वदलीय बैठक बुलाई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने...

मुख्यमंत्री ने देहरादून में राज्य जनजातीय महोत्सव में किया प्रतिभाग

0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज परेड ग्राउंड, देहरादून में राज्य जनजातीय शोध संस्थान, उत्तराखंड द्वारा आयोजित उत्तराखंड राज्य जनजातीय महोत्सव 2026 में...

भारतीय ज्ञान परंपरा को तकनीक से जोड़ने वाला ‘प्रज्ञानम्’ लॉन्च

0
देहरादून:  राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने बुधवार को लोक भवन में श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ‘प्रज्ञानम्’ एआई चैटबॉट...