देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर देवभूमि उत्तराखंड के चुनावी भ्रमण पर आ रहे हैं। देव भूमि उत्तराखण्ड की सदैव अतिथि देवो भव’’ की भावना रही है, परन्तु राज्य की जनता प्रधानमंत्री से कुछ ज्वलंत सवालों के जवाब चाहती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि उत्तराखंड के रुद्रपुर पहुंचने पर उत्तराखंड की जनता के कुछ ज्वलंत प्रश्न है जिनको लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा पूरी तरह से मौन रहे हैं। लोकसभा चुनाव के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उत्तराखंड की जनता को अपेक्षा है कि शांतिपूर्ण राज्य में धु्रवीकरण की राजनीति करने के बजाय राज्य के इन ज्वलंत मुद्दों पर अपनी पार्टी के दृष्टिकोण को स्पष्ट करेंगे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल करते हुए कहा कि उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी के जघन्य हत्याकांड पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज तक चुप क्यों रहे? राज्य की जनता को उम्मीद है कि वे हत्याकांड में शामिल भाजपा के वीआईपी नेता का नाम उजागर करेंगे। विश्व सनातन धर्म की आस्था के केंद्र बाबा केदारनाथ धाम में 230 किलो की चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? राज्य की विभिन्न भर्तियों में पेपर लीक और भर्ती घोटालों में शमिल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सैनिक बाहुल्य राज्य उत्तराखंड में युवाओं के भविष्य के साथ अग्निवीर योजना के नाम पर खिलवाड़ क्यों किया गया? एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार महिला उत्पीड़न में हिमालयी राज्यों में उत्तरखण्ड सबसे ऊपर है। राज्य में पिछले छः वर्ष में 907 बलात्कार की घटनायें तथा लगभग 800 अपहरण के मामले सामने आये हैं। प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान इन सवालों के जवाब राज्य की जनता को अवश्य देंगे।
करन माहरा ने कहा कि विगत लोकसभा चुनाव के दौरान भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखण्ड की जनता से अनेकों वायदे किये थे, जनता ने उन पर विश्वास जताते हुए राज्य के पांचों लोकसभा क्षेत्रों से उनकी पार्टी के प्रत्याशियां को भारी मतों से जिताकर भेजा था। राज्य की जनता को विश्वास था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने बचनों की गरिमा रखेंगे। वाराणसी में नरेन्द्र मोदी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार इस बात का उल्लेख किया कि उनको गंगा ने बुलाया है, लेकिन वे अपने पिछले 10 वर्ष के कार्यकाल में गंगा प्रसूता धरती को भी भूले रहे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राज्य की जनता भूली नहीं है कि 2017 और 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी चुनावी सभाओं के दौरान उत्तराखण्ड की जनता से अनेकों वादे किये थे, जनता ने उनके झांसे में आकर भाजपा को प्रचण्ड बहुमत के साथ इस आशा और विश्वास के साथ जिताकर भेजा था कि भाजपा की केंद्र व राज्य सरकारें देवभूमि की जनता से किये गये वायदों को पूरा करेंगे। लेकिन आज उत्तराखण्ड एवं पूरे देश की जनता अपने को ठगा सा महसूस कर रही है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की सरकारें जनता से किये गये वायदों को पूरा करने की दिशा में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई और आज फिर से जनता को छलने की कोशिश की जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य की जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध कांग्रेस पार्टी उत्तराखण्ड के जनसरोकारों से सम्बन्धित मुद्दों पर लगातार राज्य व केन्द्र सरकार से लड़ती रही। उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद उत्तराखण्ड को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त था, जिसे केन्द्र की भाजपा सरकार ने समाप्त कर दिया। उत्तराखण्ड राज्य में 2013 में आई भीषण केदारनाथ आपदा, रैणी आपदा तथा जोशीमठ आपदा के लिए केन्द्र सरकार ने किसी प्रकार की विशेष सहायता नहीं दी और न ही आपदाग्रस्त क्षेत्र के लोगों के विस्थापन की नीति पर काम किया।
करन माहरा ने कहा कि उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस राज्य को पर्यावरण की रक्षा के लिए ’’ग्रीन बोनस‘‘ दिये जाने, उत्तराखण्ड में स्थित केन्द्र सरकार के उपक्रमों ऋषिकेश स्थित आई.डी.पी.एल. एवं रानीबाग स्थित एच.एम.टी. संस्थानों को यथोचित आर्थिक पैकेज देकर पुनर्जीवित किये जाने, टिहरी बांध परियोजना सहित अन्य जल विद्युत परियोजनाओं का प्रबन्धन एवं स्वामित्व उत्तराखण्ड को दिये जाने, विगत कई वर्षों से प्राकृतिक आपदा की मार झेलते आ रहे हैं राज्य को विषेश पैकेज दिये जाने की मांग करती आई है परन्तु केन्द्र की भाजपा नीत मोदी सरकार अपने कार्यकाल के 10 वर्षों में राज्य वासियों के प्रति उपेक्षापूर्ण नीति अपनाये रखी। करन माहरा ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फिर से एकबार राज्य की जनता की भावनाओं से खिलवाड़ करने उत्तराखण्ड आ रहे हैं,परन्तु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने उत्तराखण्ड आगमन से पूर्व राज्य की जनता को इन सवालों के जवाब जरूर देने चाहिए।
राज्य की जनता कुछ ज्वलंत सवालों के जवाब चाहती है प्रधानमंत्री सेः कांग्रेस
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