28 C
Dehradun
Wednesday, July 8, 2026


spot_img

पर्यटकों की आवाजाही के लिए फूलों की घाटी हुई बंद

चमोली। विश्व धरोहर फूलों की घाटी शुक्रवार से पर्यटकों के लिय बंद हो गई। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष पर्यटकों की संख्या कम रही। विश्व धरोहर फूलों की घाटी पिछले दिनों बर्फ से लकदक रही। विभिन्न प्रजाति के फूलों के लिए प्रसिद्ध इस घाटी में पर्यटकों भी बर्फ का आनंद लेने के लिए पहुंचे थे। शुक्रवार 31 अक्तूबर को फूलों की घाटी पर्यटकों की आवाजाही के लिए बंद कर दी गई। इस वर्ष घाटी में 15934 देशी विदेशी पर्यटक पहुंचे, जिसमें विभाग को 3328050 की आय हुई। जबकि पिछले वर्ष घाटी में 19401पर्यटक पहुंचे थे,जिसमें विभाग को 3940850 की आय हुई थी।
घाटी में अब फूल भी कम हो चुके हैं लेकिन इस बार समय से पहले हुई बर्फबारी से घाटी में चारों तरफ बर्फ ही बर्फ नजर आई। इससे यहां के प्राकृतिक स्लोप और पहाड़ियां मनमोहक दृश्य बना रहा। स्थानीय टूर ऑपरेटर संजय सती का कहना है कि घाटी में इस बार समय से पहले बर्फबारी हुई, जिसके चलते घाटी में पर्यटक बर्फ देखने और उसका आनंद लेने के लिए पहुंचे। वहीं फूलों की घाटी की वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल ने बताया कि बर्फबारी के बाद घाटी में हर दिन आठ से दस पर्यटक पहुंच रहे थे।
फूलों की घाटी को ‘नंदन कानन’ भी कहा जाता है। यह भ्यूंडार घाटी में पुष्पावती नदी के दूसरे किनारे पर स्थित है। यह घाटी अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, अलग-अलग प्रकार के दुर्लभ फूलों और जैव विविधता के लिए जानी जाती है। यहां हर साल बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी, फोटोग्राफर और साहसिक पर्यटक पहुंचते हैं। यहां खिलने वाले रंग-बिरंगे फूल और ऊंचे पहाड़ों की गोद में स्थित यह घाटी पर्यटकों के लिए अद्वितीय अनुभव का केंद्र बनती है। शीतकाल में घाटी के बंद होने के बाद भी वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए लंबी दूरी की गश्त जारी रहेगी। घाटी में बर्फबारी तक पार्क प्रशासन की रैकी टीम समय-समय पर निरीक्षण के लिए जाएगी।  इन सुरक्षा उपायों के माध्यम से घाटी की जैव विविधता को संरक्षित करने में मदद मिलती है। पार्क प्रशासन की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक महत्वपूर्ण कदम है। फूलों की घाटी न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर भी प्रसिद्ध है। यहां खिलने वाले फूलों की लगभग 500 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें ब्रह्मकमल, ब्लू पॉपी और कोबरा लिली जैसी दुर्लभ प्रजातियां शामिल हैं।
प्रकृति प्रेमियों के लिए यह घाटी किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां आने वाले पर्यटक कहते हैं कि घाटी का दृश्य उनकी स्मृतियों में हमेशा के लिए बस जाता है। इस साल बड़ी संख्या में पर्यटकों का आना न केवल पार्क प्रशासन के लिए फायदेमंद रहा। घाटी में पर्यटकों की आवाजाही से स्थानीय व्यापारियों, होटलों, गाइड और यात्रा प्रबंधकों को भी काफी फायदा हुआ है। अब शीतकाल के दौरान घाटी में बर्फबारी होगी और प्रकृति अपने अलग ही रूप में सजकर अगले साल पर्यटकों का स्वागत करेगी।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

इथेनॉल मिश्रण वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, इससे देश को आर्थिक और पर्यावरणीय क्षेत्र में...

0
नई दिल्ली।  सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित पहल है, जिससे देश...

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय विमुक्त और घुमंतू जनजातियों के लिए शुरू कर रहा...

0
नई दिल्ली। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यमिता और आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए...

वैश्विक विकास को गति देने में भारतीय अर्थव्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण: प्रधानमंत्री मोदी

0
नई दिल्ली।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वैश्विक विकास को गति देने में भारतीय अर्थव्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इंडोनेशिया के...

उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास आवश्यकताओं के प्रति केंद्र सरकार प्रतिबद्ध

0
देहरादून। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास, पुनर्निर्माण तथा...

वात्सल्य योजना के तहत 4 करोड़ 39 लाख खातों में ट्रांसफर

0
देहरादून। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत लाभार्थियों को 4 करोड़ 39 लाख रुपए से ज्यादा...