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Thursday, August 20, 2026


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यमुनोत्री रोपवे प्रोजेक्ट के लिए पर्यटन विभाग ने किया अनुबंध

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की उपस्थिति में गुरूवार को मुख्यमंत्री आवास में यमुनोत्री रोपवे प्रोजेक्ट के लिए पर्यटन विभाग, निजी निर्माण कंपनी एस.आर.एम. इंजीनियरिंग एवं एफआईएल इंडस्ट्री प्रा. लि. के बीच अनुबंध किया गया। ले. कमान्डर दीपक खण्डूरी (से.नि.) निदेशक अवस्थापना एवं अविरल जैन ने एमओयू हस्ताक्षरित किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस रोपवे परियोजना के पूर्ण होने के बाद यमुनोत्री धाम अपने शीतकालीन स्थल खरसाली से जुड़ जायेगा। इस रोपवे परियोजना के बनने के बाद श्रद्धालुओं को यमुनोत्री धाम के दर्शन करने में सुगमता होगी। अभी पैदल मार्ग से यमुनोत्री धाम पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 2 से 3 घण्टे का समय लग जाता है, रोपवे बन जाने के बाद मात्र 15 से 20 मिनट में श्रद्धालु यमुनोत्री के दर्शन के लिए पहुंच जायेंगे एवं प्रदूषण मुक्त प्राकृतिक सौन्दर्य का लाभ उठा पायेंगे। इस रोपवे परियोजना के पूर्ण होने पर श्रद्धालुओं को तो सुविधा मिलेगी ही साथ ही स्थानीय स्तर पर लोगों के रोजगार के संसाधन भी बढ़ेंगे।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि खरसाली से यमुनोत्री धाम तक बनने वाला यह रोपवे मॉ यमुना के ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन धामों को एक साथ जोड़ने एवं उत्तराखण्ड में धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं में एक और नये अध्याय का कार्य करेगा। परियोजना का क्रियान्वयन तय सीमा में पूर्ण किये जाने का लक्ष्य रखा गया है। सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे ने कहा कि जानकीचट्टी (खरसाली) से यमुनोत्री बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा साथ ही श्रद्धालुओं को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी।

यमुनोत्री धाम के लिए बनने वाला 3.38 किमी लंबाई का यह रोपवे मोनोकेबल डिटैच्चेबल प्रकार का होगा। जिसका निर्माण यूरोपीय मानकों के अनुसार फ्रांस और स्विटजरलैंण्ड की तर्ज पर किया जायेगा। इस रोपवे की यात्री क्षमता एक घंटे में लगभग 500 लोगों को ले जाने की होगी। रोपवे के एक कोच की क्षमता आठ लोगों को ले जाने की होगी। यह रोपवे पर्यटन विभाग द्वारा पीपीपी मोड पर निर्मित किया जाना प्रस्तावित है। यमुनात्री को रोपवे से जोड़ने के साथ ही पार्किंग, आवासीय व्यवस्था, रेस्टोरेंट के निर्माण भी प्रस्तावित हैं। लगभग 166.82 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले रोपवे का लोअर टर्मिनल खरसाली में 1.787 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जायेगा, जबकि अपर टर्मिनल 0.99 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जायेगा।

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