31.8 C
Dehradun
Tuesday, March 10, 2026


spot_img

पहाड़ी लोकपर्व इगास आज, जाने दीपावली के 11 दिन बाद क्यों मनाया जाता है…

उत्तराखण्ड में सदियों से चले आ रहे इगास-बग्वाल की परम्परा उत्तराखण्ड वासियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आपको बताया दे कि सदियों से गढ़वाल में दीपावली को बग्वाल के रूप में मनाया जाता है। जबकि दीपावली (बग्वाल) के ठीक 11 दिन बाद गढ़वाल में एक और दीपावली मनाई जाती है, जिसे ईगास कहा जाता है।

दीपावली से 11 दिन बाद आने वाली एकादशी को इगास मनाया जाता है। इस पर्व के दिन सुबह मीठे पकवान बनाये जाते हैं जबकि रात में स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा अर्चना के बाद भैला जलाकर उसे घुमाया जाता है और ढोल नगाड़ों के साथ आग के चारों ओर लोक नृत्य किया जाता है। दीपावली के 11 दिन बाद इगास पर्व मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।
एक पौराणिक मान्यता है कि जब भगवान राम 14 वर्ष बाद लंका विजय कर अयोध्या पहुंचे तो लोगों ने दिये जलाकर उनका स्वागत किया और उसे दीपावली के त्योहार के रूप में मनाया। लेकिन कहा जाता है कि गढ़वाल क्षेत्र में लोगों को इसकी जानकारी 11 दिन बाद मिली। इसलिए यहां पर दीपावली के 11 दिन बाद यह दीवाली (इगास) मनाई जाती है।

वहीं दूसरी और सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार गढ़वाल के वीर भड़ माधो सिंह भंडारी टिहरी के राजा महीपति शाह की सेना के सेनापति थे। करीब 400 साल पहले राजा ने माधो सिंह को सेना लेकर तिब्बत से युद्ध करने के लिए भेजा। इसी बीच बग्वाल (दीपावली) का त्यौहार भी था, परन्तु इस त्यौहार तक कोई भी सैनिक वापिस ना आ सका। सबने सोचा माधो सिंह और उनके सैनिक युद्ध में शहीद हो गए, इसलिए किसी ने भी दीपावली (बग्वाल) नहीं मनाई। परन्तु दीपावली के ठीक 11वें दिन माधो सिंह भंडारी अपने सैनिकों के साथ तिब्बत से दवापाघाट युद्ध जीत वापिस लौट आए।

कहा जाता है कि युद्ध जीतने और सैनिकों के घर पहुंचने की खुशी में उस समय दिवाली मनाई थी। उस दिन एकादशी होने के कारण इस पर्व को इगास नाम दिया गया और उसी दिन से गढ़वाल क्षेत्र में दीपावली के 11 दिन बाद इगास पर्व मनाया जाता है। इगास पर्व के दिन लोग घरों की लिपाई-पुताई कर पारम्परिक पकवान बनाते है। गाय-बैलों की पूजा की जाती और रात को पूरे उत्साह के साथ गाँव में एक जगह इकठ्ठे होकर भैलो खेलते। भैलो का मतलब एक रस्सी से है, जो पेड़ों की छाल से बनी होती है। इगास-बग्वाल के दिन लोग रस्सी के दोनों कोनों में आग लगा देते हैं और फिर रस्सी को घुमाते हुए भैलो खेलते हैं।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

पश्चिम एशिया संकट गहराया, कतर से 1,000 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला...

0
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता और संघर्ष के कारण, कतर में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार...

जंग का आर्थिक प्रहार: कच्चे तेल में आग, बाजार धड़ाम व सोना-चांदी में उथल-पुथल;...

0
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी लड़ाई के कारण कच्चे तेल में आग लग गई है। रुपया 92.33 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर चला...

राजस्थान में मिट्टी ढहने से 7 श्रमिकों की मौत, भिवाड़ी में कापड़ीवास मोड़ के...

0
अलवर/ भिवाड़ी: भिवाड़ी के जिला अस्पताल में एंबुलेंस से एक साथ 7 शव पहुंचने से हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि हरियाणा...

ऋषिकेश में अवैध बहुमंजिला निर्माण पर एमडीडीए की बड़ी कार्रवाई, मनीराम मार्ग का भवन...

0
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत ऋषिकेश में एक बहुमंजिला भवन को सील कर...

कुंभ मेले की तैयारियां तेज, अपर मेलाधिकारी ने स्वर्गाश्रम क्षेत्र के 16 घाटों का...

0
हरिद्वार। आगामी कुंभ मेले के दृष्टिगत मेला क्षेत्र के घाटों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से मेलाधिकारी...