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Monday, August 31, 2026


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उत्तराखंड में क्यों चुनाव हार जाते हैं मुख्यमंत्री…!

देहरादून: सीएम पुष्कर सिंह धामी खटीमा विधानसभा सीट से चुनाव हार गए। खटीमा विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी भुवन चंद कापड़ी नें धामी को 6579 वोटों से मात दे दी है। खटीमा विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी भुवन चंद्र कापड़ी को 48177 वोट मिले तो बीजेपी उम्मीदवार पुष्कर सिंह धामी को 41598 वोट मिले। इस सीट पर तीसरे नंबर पर बसपा के रमेश सिंह रहे, उन्हें कुल 937 वोट मिले। धामी के चुनाव हारने के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर उत्तराखंड में मुख्यमंत्री क्यों चुनाव हार जाते हैं…!

इससे पहले मुख्यमंत्री रहते हुए हरीश रावत और भुवन चंद खंडूड़ी भी चुनाव हार चुके हैं। साल 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान भुवन चंद खंडूड़ी कोटद्वार सीट से चुनाव हार गए थे, जबकि हरीश रावत को 2017 के चुनाव के दौरान किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण सीट से हार का सामना करना पड़ा था। भुवन चंद खंडूड़ी ने मुख्यमंत्री रहते हुए 2012 में कोटद्वार सीट से चुनाव लड़ा था। तब उनके नेतृत्व में बीजेपी मैदान में उतरी थी। नारा लगाया जा रहा था कि ‘खंडूड़ी है जरूरी’ लेकिन हश्र ये हुआ कि न बीजेपी बहुमत हासिल कर पाई और न खंडूड़ी चुनाव जीत सके। चुनाव के बाद बीजेपी की वरिष्ठ नेता सुशीला बलूनी रो पड़ी थीं और उन्होंने कहा था कि कोटद्वार में बड़े पैमाने पर भितरघात हुआ। तब कई लोगों ने दबी जुबान में कहा था कि रमेश पोखरियाल निशंक ने खंडूड़ी को निपटाने का काम किया। हालांकि, खंडूड़ी ने सार्वजनिक तौर पर इस तरह की बयानबाजी नहीं की थी, लेकिन उन्होंने कहा था कि वह पार्टी फोरम पर अपनी बात रखेंगे।

हरीश रावत को 2017 में दो-दो सीटों से हार का सामना करना पड़ा था। हरीश रावत के चुनाव हारने की सबसे मुख्य वजह एंटी इनकम्बेंसी थी। स्टिंग ऑपरेशन, खनन और शराब माफिया को मदद पहुंचाने जैसे आरोपों से न सिर्फ तत्कालीन कांग्रेस सरकार बल्कि हरीश रावत की साख को भी गहरा धक्का लगा था। इसके अलावा मुस्लिम बहुल हरिद्वार ग्रामीण सीट से चुनाव हारने की बड़ी वजह बीएसपी की ओर से मुस्लिम कैंडिडेट को खड़ा करना भी रहा। तब बीएसपी प्रत्याशी ने 18 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए थे, जबकि हरीश रावत करीब 12 हजार वोटों से हारे थे। राज्य में परंपरागत रूप से कांग्रेस का वोट बैंक माने जाने वाले मुस्लिम मतदाता तब बंट गए थे।

अब पुष्कर सिंह धामी को हार का सामना करना पड़ा है। उन्हें प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भुवन चंद कापड़ी ने हराया। भुवन कापड़ी ने पिछले चुनाव में भी पुष्कर धामी को कड़ी टक्कर दी थी। खटीमा विधानसभा सीट उसी उधम सिंह नगर जिले में आती है, जहां राज्य में किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा असर था। शुरू से ही आशंका जताई जा रही थी कि किसान धामी के खिलाफ जा सकते हैं।

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