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Friday, August 14, 2026


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विदेश मंत्री जयशंकर की पाकिस्तान को खरी.खरी, कहा-उसके सीमा पार आतंक के मंसूबे सफल नहीं होंगे

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बीते दिन पाकिस्तान के बेतुके बयान का जवाब दिया। उन्होंने पड़ोसी मुल्क के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को उनके कश्मीर राग के लिए जमकर लताड़ा। उन्होंने कहा कि हमने कल इसी मंच से कुछ अजीबोगरीब और विचित्र बातें सुनीं। मैं भारत की स्थिति को बहुत स्पष्ट कर देना चाहता हूं। पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद की नीति कभी सफल नहीं होगी। उसे सजा से बचने की कोई उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए। इसके विपरीत कार्रवाई के निश्चित रूप से परिणाम होंगे। हमारे बीच हल किया जाने वाला मुद्दा केवल पाकिस्तान की ओर से अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र को खाली करना और निश्चित रूप से आतंकवाद के साथ पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे लगाव को छोड़ना है।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया बड़े पैमाने पर हिंसा जारी रहने के बारे में भाग्यवादी नहीं हो सकतीए न ही इसके व्यापक परिणामों के प्रति अभेद्य हो सकती है। चाहे यूक्रेन में युद्ध हो या गाजा में संघर्षए अंतरराष्ट्रीय समुदाय तत्काल समाधान चाहता है। इन भावनाओं को स्वीकार किया जाना चाहिए और उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। आतंकवाद दुनिया की हर उस चीज के विपरीत हैए जिसका वह समर्थन करती है। इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों का दृढ़ता से विरोध किया जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादियों को प्रतिबंधित करने में भी राजनीतिक कारणों से बाधा नहीं डाली जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई देश अपने नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण पीछे छूट जाते हैंए लेकिन कुछ देश जानबूझकर ऐसे फैसले लेते हैंए जिनके परिणाम विनाशकारी होते हैं। इसका एक बेहतरीन उदाहरण हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान है। दुर्भाग्य से उनके कुकृत्यों का असर दूसरों पर भी पड़ता हैए खास तौर पर पड़ोस पर। जब यह राजनीति अपने लोगों में इस तरह की कट्टरता भरती है। इसकी जीडीपी को केवल कट्टरता और आतंकवाद के रूप में इसके निर्यात के संदर्भ में मापा जा सकता है। आज हम देखते हैं कि दूसरों पर जो बुराइयां लाने की कोशिश की गईए वे उसके अपने समाज को निगल रही हैं। यह दुनिया को दोष नहीं दे सकता। यह केवल कर्म है। दूसरों की जमीनों पर लालच करने वाले एक बेकार देश को उजागर किया जाना चाहिए और उसका मुकाबला किया जाना चाहिए।
इससे पहले उन्होंने कहा कि हम 79वें संयुक्त राष्ट्र महासभा की थीम किसी को भी पीछे न छोड़ने का पुरजोर समर्थन करते हैं। हम यहां एक कठिन समय में एकत्र हुए हैं। दुनिया को अभी भी कोविड महामारी के कहर से उबरना बाकी है। यूक्रेन में युद्ध का तीसरा साल चल रहा है। गाजा में संघर्ष जारी है।
उन्होंने कहा कि वास्तव में आपसी संघर्षों से दुनिया विखंडितए ध्रुवीकृत और निराश है। बातचीत मुश्किल हो गई हैए समझौते तो और भी मुश्किल हो गए हैं। यह वैसा नहीं है जैसा संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक चाहते होंगे। शांति और समृद्धि दोनों खतरे में पाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि विश्वास खत्म हो गया है और प्रक्रियाएं टूट गई हैं।
जयशंकर ने कहा कि देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से जितना अधिक निवेश किया हैए उससे कहीं अधिक निकाला है। हम हर चुनौती और हर संकट में इसे स्पष्ट रूप से देखते हैंए इसलिए बहुपक्षवाद में सुधार करना अनिवार्य है। विभाजनए संघर्षए आतंकवाद और हिंसा का सामना करने वाले संयुक्त राष्ट्र से यह काम नहीं हो सकता। ऐसे में न ही इसे तब आगे बढ़ाया जा सकता हैए जब भोजनए उर्वरक और ईंधन तक पहुंच खतरे में पड़ जाए। समस्याएं संरचनात्मक कमियोंए राजनीतिक षडयंत्रोंए स्वार्थ और पीछे छूट गए लोगों के प्रति उपेक्षा के संयोजन से उत्पन्न होती हैं। हर बदलाव कहीं न कहीं से शुरू होना चाहिए और जहां से यह सब शुरू हुआ हैए उससे बेहतर कोई जगह नहीं है। हम संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों को अब गंभीरता से और उद्देश्यपूर्ण तरीके से उस कार्य को पूरा करना चाहिए। इसलिए नहीं कि यह विदेशी प्रभावों की प्रतिस्पर्धा हैए बल्कि इसलिए कि अगर हम इसी तरह चलते रहेए तो दुनिया की स्थिति और खराब हो जाएगी।
जयशंकर ने कहा कि इस मुश्किल समय में आशाए उम्मीद और आशावाद को फिर से जगाना आवश्यक है। हमें यह दिखाना होगा कि बड़े बदलाव संभव हैं। जब भारत चांद पर उतरेगाए अपना खुद का 5ळ स्टैक तैयार करेगाए दुनिया भर में टीके भेजेगाए फिनटेक को अपनाएगा या इतने सारे वैश्विक क्षमता केंद्र बनाएगाए तो यहां एक संदेश छिपा है। विकसित भारत या विकसित भारत के लिए हमारी खोज का निश्चित रूप से बारीकी से पालन किया जाएगा। कई लोगों के पीछे छूट जाने का एक महत्वपूर्ण कारण वर्तमान वैश्वीकरण मॉडल की अनुचितता है। उत्पादन के अत्यधिक संकेंद्रण ने कई अर्थव्यवस्थाओं को खोखला कर दिया हैए जिससे उनके रोजगार और सामाजिक स्थिरता पर असर पड़ा है।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया बड़े पैमाने पर हिंसा जारी रहने के बारे में भाग्यवादी नहीं हो सकतीए न ही इसके व्यापक परिणामों के प्रति अभेद्य हो सकती है। चाहे यूक्रेन में युद्ध हो या गाजा में संघर्षए अंतरराष्ट्रीय समुदाय तत्काल समाधान चाहता है। इन भावनाओं को स्वीकार किया जाना चाहिए और उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। आतंकवाद दुनिया की हर उस चीज के विपरीत हैए जिसका वह समर्थन करती है। इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों का दृढ़ता से विरोध किया जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादियों को प्रतिबंधित करने में भी राजनीतिक कारणों से बाधा नहीं डाली जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई देश अपने नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण पीछे छूट जाते हैंए लेकिन कुछ देश जानबूझकर ऐसे फैसले लेते हैंए जिनके परिणाम विनाशकारी होते हैं। इसका एक बेहतरीन उदाहरण हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान है। दुर्भाग्य से उनके कुकृत्यों का असर दूसरों पर भी पड़ता हैए खास तौर पर पड़ोस पर। जब यह राजनीति अपने लोगों में इस तरह की कट्टरता भरती है। इसकी जीडीपी को केवल कट्टरता और आतंकवाद के रूप में इसके निर्यात के संदर्भ में मापा जा सकता है। आज हम देखते हैं कि दूसरों पर जो बुराइयां लाने की कोशिश की गईए वे उसके अपने समाज को निगल रही हैं। यह दुनिया को दोष नहीं दे सकता। यह केवल कर्म है। दूसरों की जमीनों पर लालच करने वाले एक बेकार देश को उजागर किया जाना चाहिए और उसका मुकाबला किया जाना चाहिए।

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