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Monday, May 4, 2026


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भारत मॉरीशस को 680 मिलियन डॉलर का आर्थिक पैकेज देगा; सात समझौतों पर भी हुए हस्ताक्षर

नई दिल्ली/वाराणसी। भारत ने मॉरीशस को 680 मिलियन डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज देने की घोषणा की है। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, शिक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सात समझौते किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और मॉरीशस सिर्फ साझेदार नहीं, बल्कि एक परिवार हैं और हिंद महासागर की सुरक्षा दोनों की प्राथमिकता है। यह पैकेज मॉरीशस में 10 बुनियादी परियोजनाओं को लागू करने में मदद करेगा।
भारत ने गुरुवार को मॉरीशस के लिए करीब 680 मिलियन अमेरिकी डॉलर का विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की और दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने के लिए सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हिंद महासागर का स्वतंत्र और सुरक्षित रखना दोनों देशों की साझा प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मॉरीशस के समकक्ष नवीनचंद्र रामगुलाम की मेजबानी की। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों केवल साझेदार नहीं, बल्कि एक परिवार हैं। मीडिया को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत मॉरीशस के विशेष आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेंगे, खासकर मॉरीशस में यूपीआई और रुपे कार्ड की शुरुआत के बाद।
इस विशेष आर्थिक पैकेज के तहत भारत मॉरीशस में दस परियोजनाओं को लागू करने में मदद करेगा। इसमें बंदरगाह, हवाई अड्डा और सड़क जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं को मजबूत करना, नए स्कूल और अस्पताल बनाना शामिल है। मोदी ने कहा, यह कोई सहायता पैकेज नहीं है। यह हमारे साझा भविष्य में एक निवेश है। दोनों देशों के बीच जो सात समझौते किए गए, वे शिक्षा, उर्जा, हाइडोग्राफी और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देंगे। इनमें सबसे अहम समझौता हाइडोग्राफी के क्षेत्र में हुआ, जिसके तहत दोनों देस संयुक्त सर्वेक्षण, नेविगेशन चार्ट और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (ईईजेड) के हाइड्रोग्राफिक डाटा पर साथ काम करेंगे।
पीएम मोदी ने कहा, भारत और मॉरीशस दो देश हैं, लेकिन हमारे सपने और हमारी नियति एक है। मीडिया से बातचीत के दौरान मोदी ने चागोस समझौते के परिणाम पर मॉरीशस और प्रधानमंत्री रामगुलाम को बधाई दी और इसे द्वीप राष्ट्र की संप्रभुता के लिए एक ऐतिहासिक जीत बताया। उन्होंने कहा, भारत ने हमेशा उपनिवेशवाद का विरोध किया है और मॉरीशस की संप्रभुता को पूरी तरह मान्यता दी है और इस मुद्दे पर भारत ने हमेशा मॉरीशस का साथ दिया है।
मई में ब्रिटेन ने एक ऐतिहासिक समझौते के तहत चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने का फैसला किया, जिसमें डिएगो और गार्सिया भी शामिल हैं। ब्रिटेन पचास साल से अधिक समय बाद इन द्वीपों पर अधिकार छोड़ रहा है। इस समझौते के तह डिएगो गार्सिया की सुरक्षा की की जिम्मेदारी पूरी तरह ब्रिटेन के पास रहेगी। रामगुलाम ने कहा कि भारत-मॉरीशस संबंध अब एक सक्रिय और भविष्य की दृष्टि वाली दिशा में बढ़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में घनिष्ठ सहयोग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, भारत हमेशा हिंद महासागर क्षेत्र में पहला प्रतिक्रिया देने वाला और सुरक्षा प्रदान करने वाला देश है। मॉरीशस के तटरक्षक जहाज की मरम्मत भी भारत में की जा रही है और उनके 120 अधिकारियों को भारत में प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा, आज हमने हाइड्रोग्राफी के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता किया है। अगले पांच वर्षों में हम संयुक्त सर्वेक्षण, नेविगेशन चार्ट और ईईजेड के हाइड्रोग्राफिक डाटा पर एक साथ काम करेंगे।
पीएम मोदी ने कहा कि मॉरिशस, भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और ‘महासागर’ दृष्टिकोण का एक अहम हिस्सा है। उन्होंने इस दृष्टिकोण को मार्च में अपनी मॉरीशस यात्रा के दौरान पेश किया था। उन्होंने यह भी घोषणा की कि मॉरीशस में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एक नया निदेशालय स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा, बहुत जल्द हम मॉरीशस में मिशन कर्मयोगी के प्रशिक्षण मॉड्यूल भी शुरू करेंगे।

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