19.1 C
Dehradun
Wednesday, April 15, 2026


spot_img

महाकुंभ में पहली बार एक मंच पर आए तीन पीठों के शंकराचार्य, जारी किया संयुक्त धर्मादेश

महाकुंभनगर: महाकुंभ में पहली बार देश के तीन पीठों के शंकराचार्य एक ही मंच पर मिले और सनातन के लिए संयुक्त धर्मादेश जारी किया। धर्मादेश में देश की एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण निर्णय किए गए। वहीं, शंकराचार्यों ने आह्वान किया कि महाकुंभ पर्व पर प्रत्येक सनातनी को प्रयागराज आना चाहिए। उन्होंने महाकुंभ के भव्य आयोजन के लिए योगी सरकार और प्रशासन को आशीर्वाद भी दिया। महाकुंभ में देश के तीन पीठों के शंकराचार्यों ने पहली बार मंच साझा किया है। महाकुंभ में चल रही परम धर्म संसद के शिविर में तीन पीठों के शंकराचार्यों ने समवेत रूप से एक संयुक्त धर्मादेश भी जारी किया है। श्रृंगेरी शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी विधु शेखर भारती जी, द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी और ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने परम धर्मसंसद में हिस्सा लिया और सनातन संस्कृति की रक्षा और उन्नयन के लिए 27 धर्मादेश भी जारी किए।
इस अवसर पर शंकराचार्य स्वामी सदानंद ने संस्कृत भाषा के महत्व पर जोर दिया। श्रृंगेरी के शंकराचार्य विदुशेखर भारती ने गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने और गौ माता की विशेष रूप से रक्षा करने की बात कही। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संस्कृत भाषा के महत्व पर जोर देते हुए सरकार को संस्कृत भाषा के लिए बजट देने पर जोर दिया।
27 बिंदुओं वाले धर्मादेश में देश की एकता, अखंडता और समरसता के साथ सनातन धर्म की संस्कृति की रक्षा, विस्तार और संस्कृत भाषा के विस्तार पर जोर दिया गया। धर्मादेश में नदियों और परिवार रूपी संस्था को बचाने के लिए सबको आगे आने का आदेश दिया गया। धार्मिक शिक्षा को हिंदुओं का मौलिक अधिकार बनाने पर भी इसमें जोर दिया गया। यह भी कहा गया कि अपने धार्मिक प्रतीकों को पहचानें और उसकी रक्षा अवश्य करें। हर विद्यालय में देव मंदिर हो।
धर्मादेश के मूल में गौ हत्या पर रोक है और उसे राष्ट्र माता घोषित करने का आदेश दिया गया। पहले ही धर्मादेश में कहा गया कि गाय को माता मानने वाले देश भारत की धरती से गौहत्या का कलंक मिटना चाहिए। विश्वमाता गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान मिलना चाहिए और उनकी हत्या को दण्डनीय अपराध घोषित करना चाहिए। गौहत्या से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी रूप से जो जुड़ा हो वह हिंदू नहीं हो सकता। उसे हिंदू धर्म से बहिष्कृत किया जाए।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

‘राष्ट्रीय सुरक्षा सिर्फ सेना ही नहीं, जनता की भी जिम्मेदारी’, NSA अजीत डोभाल ने...

0
अहमदाबाद: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि देश की असली ताकत उसकी जनता की इच्छाशक्ति होती है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा...

निर्वाचन अधिकारी के ‘फिल्मी’ पोस्ट पर मचा बवाल, टीएमसी ने EC से की कार्रवाई...

0
कोलकाता: कोलकाता दक्षिण के चुनाव अधिकारी ने अपने एक्स पोस्ट में बॉलीवुड गाने और 'बर्नोल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। अब इसके खिलाफ तृणमूल...

आंतरिक सुरक्षा राष्ट्र की प्रगति और विकास की अनिवार्य शर्तः राष्ट्रपति

0
नई दिल्ली। आंतरिक सुरक्षा राष्ट्र की प्रगति और विकास की अनिवार्य शर्तः राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय सुरक्षा की तेजी से बदलती...

22 अप्रैल को खुलेंगे बाबा तुंगनाथ के कपाट, मदमहेश्वर के कपाट 21 मई को...

0
रुद्रप्रयाग। पंचकेदारों में तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ एवं द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर के कपाट खुलने की तिथियां वैशाखी पर्व पर शीतकालीन गद्दी स्थलों में...

बिना इनर लाइन परमिट के आदि कैलाश पहुंचे पर्यटक, प्रशासन ने दिए जांच के...

0
पिथौरागढ़। कुछ पर्यटक बिना इनर लाइन परमिट के प्रसिद्ध आदि कैलाश पहुंच गए। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मचा है। धारचूला...