7.7 C
Dehradun
Thursday, January 8, 2026


सरकारी बैंकों में 49% विदेशी निवेश की मंजूरी दे सकती है सरकार; RBI से चर्चा कर रहा वित्त मंत्रालय

नई दिल्ली: सरकारी बैंकों में 49 फीसदी तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मंजूरी मिल सकती है। यह वर्तमान सीमा 20 फीसदी के दोगुना से भी ज्यादा है। यह कदम सरकारी और निजी बैंकों के लिए नियमों के बीच के अंतर को कम करने के प्रयास का हिस्सा है। निजी बैंकों में एफडीआई की वर्तमान सीमा 74 फीसदी तक है।
वित्त मंत्रालय कुछ महीनों से भारतीय रिजर्व बैंक के साथ इस मामले पर चर्चा कर रहा है। प्रस्ताव को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। भारत के बैंकिंग उद्योग में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है। दुबई के एमिरेट्स एनबीडी ने हाल में करीब 27,000 करोड़ रुपये (3 अरब डॉलर) में आरबीएल बैंक में 60 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जताई है। जापान के सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्प ने करीब 17,000 करोड़ रुपये में यस बैंक में 25 फीसदी हिस्सा खरीदा है।
सरकारी बैंकों में विदेशी स्वामित्व की सीमा बढ़ाने से उन्हें आने वाले वर्षों में और अधिक पूंजी हासिल करने में मदद मिलेगी। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि दर पिछले तीन वित्त वर्षों में औसतन 8 फीसदी की रही है। ऋण की मांग में भी तेजी आई है। इससे देश के ऋणदाताओं का आकर्षण बढ़ा है। जनवरी से सितंबर के बीच भारत के वित्तीय क्षेत्र में सौदे 127 फीसदी बढ़कर 8 अरब डॉलर हो गए।
भारत में 12 सरकारी बैंक हैं। इनकी संयुक्त संपत्ति मार्च तक 1.71 लाख करोड़ रुपये थी। यह पूरे बैंकिंग क्षेत्र का 55 फीसदी हिस्सा है। सरकार सरकारी बैंकों में न्यूनतम 51 फीसदी हिस्सेदारी बनाए रखने की योजना बना रही है। वर्तमान में सभी 12 बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी इससे बहुत अधिक है। कुछ में तो 90 फीसदी तक है।
स्टॉक एक्सचेंजों के आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर तक सरकारी बैंकों में विदेशी हिस्सेदारी केनरा बैंक में लगभग 12% से लेकर यूको बैंक में लगभग शून्य के स्तर तक है। सामान्य तौर पर सरकारी बैंकों को उनके निजी समकक्षों की तुलना में कमजोर माना जाता है। आरबीआई ने पिछले कुछ महीनों में बैंकिंग क्षेत्र में नियमों को कम करने और आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। साथ ही विदेशी बैंकों को भारतीय निजी ऋणदाताओं में बड़ी हिस्सेदारी रखने की अनुमति देने के लिए और अधिक खुला रुख अपनाया है।49 फीसदी सीमा के बाद 51 फीसदी हिस्सा सरकारी बैंकों के पास रहेगा। ऐसे में बैंक पर नियंत्रण घरेलू निवेशकों का ही रहेगा। यह हिस्सेदारी छोटे और बड़े निवेशकों सहित सरकार की भी होगी। इससे विदेशी हाथों में बैंकों का नियंत्रण नहीं जाएगा।
बैंकों के बोर्ड में विदेशी कंपनियों के भी अधिकारी होंगे। निवेश आने से बैकोंं को विस्तार करने में मदद मिलेगी। वैश्विक स्तर पर उनकी पहुंच आसान होगा।
इस खबर के बाद सोमवार के कारोबारी सत्र में निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 3.02 फीसदी बढ़कर 8053 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अंत में 2.22 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। सरकारी बैंकों के शेयर 4.48 फीसदी तक बढ़ गए। एसबीआई का शेयर 2.08 फीसदी, पीएनबी का 2.48 फीसदी, केनरा का 2.78 फीसदी, बैंक ऑफ बड़ौदा का 2.87 फीसदी, यूनियन बैंक का 2.08 फीसदी और बैंक ऑफ इंडिया का शेयर 4.48 फीसदी चढ़कर बंद हुआ।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

इंडिगो की उपलब्धि: भारत का पहला एयरबस A321XLR विमान दिल्ली में उतारा, लंबी दूरी...

0
नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइनइंडिगो ने आज एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अपना पहला एयरबसA321XLR (एक्स्ट्रालॉन्ग रेंज) विमान दिल्ली...

अमेरिकी कानून के उल्लंघन पर स्टूडेंट वीजा पाने में होगी मुश्किल, US दूतावास ने...

0
नई दिल्ली। भारत में अमेरिकी दूतावास ने बुधवार को कहा कि अमेरिकी कानूनों का उल्लंघन करने पर छात्र वीजा को लेकर गंभीर परिणाम हो...

यूपी में टल सकते हैं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव, आरक्षण की वजह से आ सकती...

0
लखनऊ: यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टलने के संकेत मिल रहे हैं। मुख्य कारण अभी तक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना...

पीएम मोदी-गृह मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करने वालों पर एफआईआर दर्ज, जेएनयू प्रशासन ने...

0
नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी को लेकर दिल्ली पुलिस...

ग्रीन बिल्डिंग की सुस्त रफ्तार पर भड़के डीएम सविन बंसल, अधिकारियों को लगाई फटकार

0
देहरादून। हरिद्वार रोड स्थित स्मार्ट सिटी लिमिटेड परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन ग्रीन बिल्डिंग कार्यों की प्रगति को लेकर बुधवार को जिलाधिकारी सविन बंसल ने...