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Tuesday, September 22, 2026


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‘दुनिया के दबाव में झुकेगा नहीं ईरान’, अमेरिका से तनाव के बीच राष्ट्रपति पेजेशकियन का बड़ा बयान

तेहरान। अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शनिवार को कहा कि उनका देश दुनिया की ताकतों के दबाव के आगे सिर नहीं झुकाएगा। पेजेशकियन ने एक सरकारी टेलीविजन चैनल पर अपने संबोधन में कहा, ‘दुनिया की ताकतें हमें सिर झुकाने के लिए मजबूर करने के लिए लाइन में खड़ी हैं। लेकिन वे हमारे लिए जो भी दिक्कतें खड़ी करें, हम सिर नहीं झुकाएंगे।’
उनकी यह टिप्पणी तब आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वह ईरान पर सीमित कार्रवाई करने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया में नौसैनिक ताकत बढ़ाने का आदेश दिया था, जिसका मकसद तेहरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए समझौता करने का दबाव बनाना था।
यह नई चेतावनी ईरान के विदेश मंत्री के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा कि इस सप्ताह की शुरुआत में जिनेवा में दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत के बाद वॉशिंगटन के साथ समझौते का एक मसौदा प्रस्ताव कुछ ही दिनों में तैयार हो सकता है।
ट्रंप ने गुरुवार को कहा था कि अगर तेहरान 10 दिनों के अंदर समझौता नहीं करता है, तो चीजें खराब होंगी। इस समयसीमा को बाद में उन्होंने 15 दिन तक बढ़ाया। शुक्रवार को एक पत्रकार ने पूछा कि क्या वह एक सीमित सैन्य हमले के बारे में सोच रहे हैं, तो ट्रंप ने जवाब दिया, मैं ज्यादा से ज्यादा यही कह सकता हूं कि मैं इस पर विचार कर रहा हूं।
सैन्य दबाव बढ़ाने की रणनीति के तहत विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड को शुक्रवार को भूमध्य सागर में घुसते देखा गया, जो ट्रंप के आदेश के बाद जिब्राल्टर जलडमरूमध्य से गुजर रहा था। वॉशिंगटन ने जनवरी में ही यूएसएस अब्राहम लिंकन और एस्कॉर्ट युद्धपोत को खाड़ी में तैनात कर दिया था।
जिनेवा में बातचीत के बाद तेहरान की ओर से कहा गया कि दोनों पक्ष एक संभावित समझौते का मसौदा पेश करने पर सहमत हो गए हैं, जिसके बारे में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी मीडिया को बताया कि यह ‘अगला कदम’ होगा। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि अगले दो-तीन दिनों में यह तैयार हो जाएगा और इसे (राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत) स्टीव विटकॉफ को सौंप दिया जाएगा। अराघची ने यह भी कहा कि अमेरिका के मध्यस्थों ने तेहरान से अपना परमाणु संवर्धन कार्यक्रम खत्म करने का आग्रह नहीं किया था, जो अमेरिकी अधिकारियों के बयानों से विपरीत है।

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