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Sunday, September 20, 2026


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कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विविध क्षेत्रों में उपयोग पर आयोजित हुआ सार्थक विमर्श

देहरादून। तेलंगाना लोक भवन में “विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग” विषय पर एक महत्वपूर्ण विचार-विमर्श का आयोजन किया गया, जिसमें राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। कार्यक्रम में रक्षा, काउंटर-ड्रोन तकनीक, एविएशन एवं एम्फीबियस विमानन, चिकित्सा तथा सशस्त्र बलों से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों ने भाग लिया और अपने-अपने क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, संभावनाओं एवं चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। अपने उद्बोधन में राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज केवल एक तकनीकी अवधारणा नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति बन चुकी है जो शासन, सुरक्षा, स्वास्थ्य और विकास के स्वरूप को तेजी से परिवर्तित कर रही है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि एआई का उपयोग जिम्मेदारी, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों के साथ किया जाना चाहिए, ताकि यह समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए लाभकारी सिद्ध हो सके।
विचार-विमर्श के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि रक्षा क्षेत्र में एआई आधारित काउंटर-ड्रोन प्रणाली आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर रही है। वहीं एविएशन और एम्फीबियस तकनीकों में एआई के उपयोग से आपदा प्रबंधन, विशेषकर पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में, त्वरित और सुरक्षित सहायता संभव हो रही है। चिकित्सा क्षेत्र में एआई की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह तकनीक दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने, रोगों के प्रारंभिक निदान तथा टेलीमेडिसिन को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड के विशेष संदर्भ में यह चर्चा अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि राज्य की भौगोलिक संवेदनशीलता और प्राकृतिक चुनौतियों को देखते हुए, एआई आधारित समाधान जैसे आपदा पूर्वानुमान, पर्यावरण संरक्षण और स्मार्ट पर्यटन आदि राज्य के सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के “आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य को सशक्त बनाने में एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ सिद्ध हो सकती है। उन्होंने कहा कि इसके लिए तकनीकी नवाचार के साथ-साथ नैतिक नेतृत्व और बहु-क्षेत्रीय सहयोग आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य केवल तकनीकी प्रगति में नहीं, बल्कि उसके जिम्मेदार और मानवीय उपयोग में निहित है। इस अवसर पर किरण राजू, डॉ. सुब्बा राव, गोपी रेड्डी, विंग कमांडर साईं सहित अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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