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Friday, February 13, 2026


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बंंपर जीत के बाद हेमंत सोरेन ने दिया अपना संदेश, कहा- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर रहेगा फोकस, हमने मिलकर किया काम

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा चुनाव में मिली सफलता के लिए राज्य के लोगों का आभार जताया था। अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में वे खासे उत्साहित दिखे। उन्होंने जोर देकर कहा – अबुआ राज, अबुआ सरकार। सीएम आवास में उमड़े झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकर्ता इस दौरान नारे लगा रहे थे – एक ही नारा, हेमंत दोबारा। उत्साहित हेमंत सोरेन ने कहा कि वे जनादेश के लिए राज्य के लोगों का आभार प्रकट करते हैं। ढेरों परिणाम आ गए हैं। कुछ ज्यादा देर फिर से काउंटिग हो रही है। आईएनडीआईए की एनडीए से लड़ाई थी। मतदाताओं ने खुले मन से आशीर्वाद दिया। आधी आबादी से लेकर नौजवानों, पुरुषों, किसानों और मजदूरों ने साथ दिया। सभी जाति-धर्म के लोगों ने मताधिकार का उपयोग किया।
लोकतंत्र के महापर्व में सब उत्साह से शामिल हुए। लोकतंत्र में सबकी अहम भूमिका है। इसकी ताकत को लोगों ने जन-जन तक पहुंचाया है। अंतिम परिणाम का इंतजार है। सारा परिणाम घोषित होने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे। उन्होंने गठबंधन के प्रदर्शन पर संतोष जताते हुए कहा कि हम दो तिहाई बहुमत से आगे हैं। झारखंड इतिहास गढ़ने जा रहा है। पहली बार ऐसा चुनाव हुआ है। लोकतंत्र की परीक्षा को हमने सफलता से पास किया। इस दौरान खबर आई कि प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई संदेश भेजा है। हेमंत सोरेन ने उन्हें धन्यवाद दिया। हेमंत सोरेन के साथ इस मौके पर कल्पना सोरेन समेत गठबंधन दल के अन्य नेता भी उपस्थित थे। इससे पहले मीडिया से बातचीत में हेमंत सोरेन ने कहा कि वे अपनी बातें लोगों तक पहुंचाने में सफल रहे। उन्होंने कल्पना सोरेन की मेहनत का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बार हम दो थे। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर राज्य सरकार का पूरा फोकस होगा। पहले से ही इसका आभास था कि चुनाव बहुत कठिन होगा। सरकार की मंइयां सम्मान योजना का भी लाभ मिला।
भाजपा बाहर के लोगों के चलते हारी भाजपा द्वारा उठाए गए मुद्दों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि हमने लोगों को विकास कार्यों के बारे में बताए। भाजपा के हर सवाल का जवाब दिया। लोगों ने भरोसा दिया। यह महत्वपूर्ण है कि हम लोगों तक अपनी बातें कैसे पहुंचाते हैं। शिक्षक और छात्र जैसा समन्वय होना चाहिए। राज्य को हम पांच साल से देख रहे हैं। जितने बाहर के लोग यहां सक्रिय थे, उन्हें जनता ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पिता शिबू सोरेन के कार्य के असर था कि आदिवासी मतदाता डटे रहे। उन्होंने सबको एक कर रखा। इस बार के चुनाव में पिता साथ में नहीं थे। राज्य के लोग उनके संघर्ष को भूले नहीं हैं। चुनाव प्रचार कार्य के दौरान अधिक दबाव को लेकर उन्होंने कहा कि बहुत ज्यादा प्रेशर था। कभी-कभी गले में ज्यादा दर्द होता था। बहुत ज्यादा भाषण दिए। ऐसा चुनाव पहले नहीं हुआ।

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