नई दिल्ली। माओवादियों के टॉप लीडरशीप को खत्म करने के बाद उनके हर निशान मिटाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत बड़े पैमाने पर माओवादियों के जुड़े स्मारकों को ध्वस्त किया जा रहा है और जंगल में छुपाए गए हथियारों (आर्म्स डंप) को ढूंढकर जब्त किया जा रहा है।
इस बरसात के महीने में माओवादियों से जुड़े स्थानों पर बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने का अभियान भी शुरू किया जाएगा, ताकि आने वाले सालों में उनकी पूरी पहचान ही बदली नजर आए। गृहमंत्री अमित शाह मे मार्च 2026 तक माओवाद के संपूर्ण खात्म के लक्ष्य दिया था जो लगभग पूरा हो चुका है। बहुत जल्द इसकी घोषणा भी हो सकती है।
माओवादी शीर्ष नेतृत्व के खात्मे के बाद अभियान तेज
माओवादी विरोधी आरपेशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भविष्य में माओवाद के फिर से पैर जमाने की हर आशंका को पूरी तरह से निर्मूल करने का निर्देश दिया है। इसके लिए एक ओर माओवादी प्रभावित इलाकों के विकास और वहां के लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की योजनाएं तैयार करने के साथ ही उनका तेजी से क्रियान्वय सुनिश्चित किया जा रहा है।
इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि माओवादियों द्वारा छुपाए गए हथियारों के सहारे नए सिरे सशस्त्र संघर्ष की कोशिश शुरू नहीं की जा सके। इस अभियान के तह छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में इस साल एक जनवरी से तक 69 से अधिक आर्म्स डंप को खोजा चुका है। जिनमें अकेले छत्तीसगढ़ के 58 आर्म्स डंप हैं। इन आर्म्स डंप से 12 हथियार मिले हैं, जिनमें एके 47, एसएलआर, मोर्टार, इंसास, राइफल, बीजीएल लांचर से लेकर पिस्तौल शामिल हैं।
इसके अलावा 705 गोलियां, 52 आइईडी, 95 ग्रेनेड, 406 किलोग्राम विस्फोटक, 1093 डिटोनेटर और 2612 मीटर कोडेक्स तार और सेफ्टी फ्यूज शामिल हैं। कोडेक्स तार को आइईडी बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बरसात शुरू होने के पहले तक सभी आर्म्स डंप का पता लगाकर उन्हें जब्त करने की कोशिश है।
माओवादियों से जुड़े स्मारकों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया 2023 में शुरू की गई थी। लेकिन उस साल सिर्फ एक स्मारक को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में ध्वस्त किया गया था। वहीं 2024 में छत्तीसगढ़ आठ व महाराष्ट्र में दो स्मारक और 2025 में छत्तीसगढ़ में 11 और महाराष्ट्र में सात स्मारक ध्वस्त किये गए। 2026 में इसमें काफी तेजी आई है और दो महीने के भीतर ही छत्तीसगढ़ में 130 स्मारकों को ध्वस्त किया जा चुका है।
इसके साथ ही महाराष्ट्र में 45 स्मारक ध्वस्त किए गए है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि लंबे समय तक माओवादियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में हजारों समारक होने की आशंका है। उनके अनुसार इन सभी को बरसात के पहले ध्वस्त करने का लक्ष्य है ताकि बरसात शुरू होने पर वहां बड़े पैमाने पर पौधारोपन का कार्यक्रम शुरू किया जा सके।
टॉप लीडरशीप के खात्मे के बाद माओवादियों का हर निशान मिटाने की तैयारी
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