नई दिल्ली: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की 16 प्रतिशत एआई प्रतिभा भारतीय मूल के है। इस क्षेत्र में अगले 15 वर्षों में वैश्विक जीडीपी वृद्धि में भारत का योगदान 20 प्रतिशत तक हो सकता है। रिपोर्ट में एआई को नौकरियों के खतरे के बजाय उत्पादकता और समावेशी विकास बढ़ाने वाले माध्यम के रूप में पेश किया गया है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान मंगलवार को जारी एक श्वेत पत्र (व्हाइट पेपर) में कहा गया है कि दुनिया की लगभग 16 प्रतिशत एआई प्रतिभा भारतीय मूल की है, जिससे वैश्विक एआई क्षमता के क्षेत्र में भारत को विशेष बढ़त मिलती है। साथ ही अनुमान है कि आने वाले 15 वर्षों में वैश्विक जीडीपी वृद्धि में भारत का योगदान लगभग 20 प्रतिशत तक हो सकता है। यह श्वेत पत्र इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान जारी किया गया। इसका उद्देश्य एआई को केवल ऑटोमेशन और नौकरियों में कटौती के नजरिये से देखने के बजाय उत्पादकता बढ़ाने, संस्थागत मजबूती और डिजिटल अर्थव्यवस्था में समान भागीदारी के रूप में प्रस्तुत करना है।
“एआई फॉर ऑल: कैटलाइजिंग जॉब्स, ग्रोथ एंड अपॉर्चुनिटी” शीर्षक वाला यह श्वेत पत्र वैश्विक तकनीकी कंपनी प्रोसस ने नॉलेज पार्टनर बीसीजी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सहयोग से लॉन्च किया। श्वेत पत्र में कहा गया है कि विकास का अगला चरण केवल एआई तक पहुंच से नहीं, बल्कि उसके अनुशासित क्रियान्वयन और बड़े पैमाने पर संस्थागत अपनाने से तय होगा। यह दस्तावेज नीति निर्माताओं और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ हुई चर्चाओं के आधार पर तैयार किया गया है और इसे रोजगार, उत्पादकता और समावेशी विकास को बढ़ावा देने का खाका बताया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और इंडियाएआई मिशन के सीईओ अभिषेक सिंह ने कहा कि भारत ने मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है और दुनिया के सबसे बड़े एआई टैलेंट पूलों में से एक विकसित किया है। अब अगला चरण इन क्षमताओं को संस्थागत ढांचे में बदलकर ठोस परिणाम हासिल करना है। श्वेत पत्र में जन धन, आधार, यूपीआई, अकाउंट एग्रीगेटर और ओएनडीसी जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विश्लेषण करते हुए बताया गया है कि एआई को जिम्मेदारी के साथ अपनाकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है; इससे भारत ग्लोबल साउथ के लिए एक मॉडल बन सकता है।
एआई फॉर ऑल प्रोजेक्ट के मुख्य मेंटर और सेंटर फॉर द डिजिटल फ्यूचर के चेयरमैन रेंटाला चंद्रशेखर ने कहा कि एआई को कृषि बाजारों, कक्षाओं, अस्पतालों, फैक्ट्रियों और वित्तीय प्रणालियों में संस्थागत रूप देना जरूरी है। यदि इसे जिम्मेदारी से लागू किया जाए, तो यह रोजगार सृजन, भरोसे और दीर्घकालिक उत्पादकता को बढ़ावा दे सकता है। प्रोसस इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर सेहराज सिंह ने कहा कि भारत के विकास का अगला चरण एआई की उपलब्धता से नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर उसके प्रभावी क्रियान्वयन से तय होगा। बीसीजी के एमडी और पार्टनर विपिन वी ने कहा कि अगली बड़ी चुनौती एआई को संस्थागत रूप देना है। इसे एक रणनीतिक क्षमता के रूप में अपनाना होगा, जो सीधे परिणाम, आर्थिक लाभ और दीर्घकालिक प्रणालीगत प्रदर्शन से जुड़ी हो।
एआई इम्पैक्ट समिट-2026 में बड़ा खुलासा, दुनिया की 16% एआई प्रतिभा भारतीय
Latest Articles
युवाओं के नेतृत्व और सक्रिय जनभागीदारी से साकार होगा नशा मुक्त भारत का सपना:...
नई दिल्ली। युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि नशा मुक्त भारत का सपना केवल सक्रिय जनभागीदारी और युवाओं के...
अल्पसंख्यक समाज के उत्थान के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्धः सीएम धामी
-योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगाः मुख्यमंत्री
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अल्पसंख्यक मोर्चा महानगर, देहरादून द्वारा आयोजित ‘लाभार्थी...
ब्रिक्स वेव्स बाज़ार का आयोजन करेगा राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम
नई दिल्ली। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) इस महीने की 6 और 7 तारीख को मुंबई में ब्रिक्स...
अरुणाचल प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में तेज बारिश का ऑरेंज अलर्ट
नई दिल्ली। मौसम विभाग ने कल अरुणाचल प्रदेश, बिहार, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में तेज बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया...
पीएम नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत के लिए नशा-मुक्त युवा संकल्प अभियान की शुरुआत...
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत के लिए नशा-मुक्त युवा संकल्प अभियान की नई दिल्ली में शुरुआत की। वर्चुअल माध्यम से उन्होंने...

















