नई दिल्ली। प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। विश्व के सबसे पवित्र बौद्ध तीर्थ स्थलों में से एक सारनाथ को दक्षिण कोरिया के बुसान में चल रही यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र के दौरान यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण-ए.एस.आई ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि सारनाथ भारत का 45वां विश्व धरोहर स्थल बन गया है, जिससे वैश्विक मंच पर देश की सांस्कृतिक विरासत और मजबूत हुई है।
सारनाथ बौद्ध धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र स्थल है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित इस ऐतिहासिक स्थल पर भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना प्रथम उपदेश दिया था।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होना हर भारतीय के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है। सोशल मीडिया पोस्ट में राधाकृष्णन ने कहा कि सारनाथ शांति, ज्ञान और करुणा का एक चिरस्थायी प्रतीक है, जो भारत की शाश्वत आध्यात्मिक और दार्शनिक विरासत का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया है। सोशल मीडिया पोस्ट में श्री मोदी ने कहा कि सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा संबंध है, जिनके ज्ञान, करुणा और सद्भाव के शाश्वत संदेश से विश्व प्रेरित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मान्यता देश की समृद्ध सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत का सम्मान करती है। श्री मोदी ने कहा कि इससे दुनिया भर के लोग सारनाथ आने और भगवान बुद्ध के आदर्शों से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।
संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह मानवता के लिए भारतीय सभ्यता के गहन आध्यात्मिक और दार्शनिक योगदान को दर्शाता है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने से देश का सांस्कृतिक गौरव और बढ़ गया है। श्री शाह ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सारनाथ भगवान बुद्ध से जुड़ी भारत की प्राचीन विरासत का प्रतीक है। गृह मंत्री ने कहा कि सारनाथ को यूनेस्को सूची में शामिल किए जाने से बुद्ध का ज्ञान का प्रकाश और अधिक लोगों तक पहुंचेगा और उन्हें बेहतर दुनिया के लिए शांति और ज्ञानोदय के आदर्शों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

















