19 C
Dehradun
Sunday, January 18, 2026


धर्मांतरण को गंभीर बताकर जमानत देने से इनकार नहीं कर सकते, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जजों को चेताया

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक रूप से विक्षिप्त नाबालिग लड़के को इस्लाम में धर्मांतरित करने के आरोपी मौलवी को जमानत देने से मना करने पर सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट को कड़ी फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि जमानत देना विवेक का मामला है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जज अपनी मर्जी से धर्मांतरण को बहुत गंभीर मामला बताकर जमानत देने से मना कर दें। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने अपने आदेश में कहा, हम समझ सकते हैं कि ट्रायल कोर्ट ने जमानत देने से मना कर दिया क्योंकि ट्रायल कोर्ट शायद ही कभी जमानत देने का साहस जुटा पाते हैं, चाहे वह कोई भी अपराध हो। लेकिन कम से कम, हाईकोर्ट से यह उम्मीद की जाती थी कि वह साहस जुटाए और अपने विवेक का न्यायपूर्ण तरीके से इस्तेमाल करे।
शीर्ष अदालत ने मौलवी सैयद शाद खजमी उर्फ मोहम्मद शाद को रिहा करने का आदेश दिया। कानपुर नगर में दर्ज मामले में गिरफ्तार शाद 11 महीने से जेल में था। अदालत ने महसूस किया कि वास्तव में यह मामला सर्वाेच्च न्यायालय तक नहीं पहुंचना चाहिए था। सरकार की तरफ से पेश वकील ने पीठ को बताया कि आरोपी को अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा वाले अपराध में गिरफ्तार किया गया था। वहीं, बचाव पक्ष ने दावा किया कि लड़के को सड़क पर छोड़ दिया गया था और उसने मानवीय आधार पर नाबालिग को आश्रय दिया।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के पास जमानत देने से इन्कार करने का कोई उचित कारण नहीं था। आरोपी पर लगा अपराध हत्या, डकैती, बलात्कार आदि जैसा गंभीर या संगीन नहीं है। वह यह समझने में विफल रही कि यदि याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा कर दिया जाता तो अभियोजन पक्ष को क्या नुकसान होता। याचिकाकर्ता पर मुकदमा चलाया जाएगा और अंततः यदि अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में सफल होता है, तो उसे दंडित किया जाएगा।
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि हर साल ट्रायल जजों को यह समझाने के लिए इतने सारे सम्मेलन, सेमिनार, कार्यशालाएं आदि आयोजित की जाती हैं कि जमानत आवेदन पर विचार करते समय उन्हें अपने विवेक का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए। पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, कभी-कभी जब उच्च न्यायालय वर्तमान प्रकार के मामलों में जमानत देने से इनकार करता है तो इससे यह आभास होता है कि पीठासीन अधिकारी ने जमानत देने के सुस्थापित सिद्धांतों की अनदेखी करते हुए पूरी तरह से अलग विचार रखे हैं। यही एक कारण है कि हाईकोर्ट और अब दुर्भाग्य से देश के सर्वाेच्च न्यायालय में जमानत आवेदनों की बाढ़ आ गई है।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों-नक्सलियों के बीच मुठभेड़, आठ लाख का इनामी माओवादी और तीन साथी...

0
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच शनिवार को मुठभेड़ में आठ लाख का इनामी माओवादी दिलीप बेड़जा अपने तीन...

इंडिगो पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना, दिसंबर संकट के लिए शीर्ष प्रबंधन पर...

0
नई दिल्ली: भारतीय विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (InterGlobe Aviation) के खिलाफ अब तक की सबसे...

पीएम के असम दौरे पर चार किलोमीटर तक मोदी-मोदी की गूंज, दिखी बोडो संस्कृति...

0
गुवाहाटी। पश्चिम बंगाल दौरा पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम पहुंचे। गुवाहाटी में एयरपोर्ट पर उतरने के बाद पीएम मोदी ने चार...

केंद्रीय गृह मंत्री और थलसेना अध्यक्ष ने किया विश्व पुस्तक मेले का दौरा

0
नई दिल्ली: विश्व पुस्तक मेला 2026 के आठवें दिन भी अभूतपूर्व जन उत्साह देखने को मिला। सप्ताहांत की भारी भीड़ के बीच भारत मंडपम...

सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरणः एसआईटी चीफ आईजी एसटीएफ पहुंचे काठगोदाम, क्राइम सीन का किया...

0
देहरादून। नीलेश आनन्द भरणे आईजी एसटीएफ/अध्यक्ष एसआईटी मय टीम के काठगोदाम पहुंचे, जहां पर उनके द्वारा घटनास्थल (क्राइम सीन) का निरीक्षण किया गया। इस...