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Tuesday, March 10, 2026


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चीफ जस्टिस गुहानाथन नरेंद्र ने ली उत्तराखण्ड के मुख्य न्यायाधीश की शपथ

देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने गुरुवार को राजभवन देहरादून में उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुहनाथन नरेंदर को पद की शपथ दिलायी। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने भारत की राष्ट्रपति द्वारा न्यायमूर्ति गुहनाथन नरेंदर को उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने से संबंधित अधिपत्र पढ़ा। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रथम महिला गुरमीत कौर, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, डॉ. धन सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, डीजीपी दीपम सेठ, नैनीताल हाईकोर्ट की रजिस्ट्रार जनरल कहकशा खान, सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, विधि परामर्शी अमित कुमार सिरोही सहित वरिष्ठ न्यायमूर्तिगण, वरिष्ठ अधिकारीगण व अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
गुहानाथान नरेंद्र को बीते दिनों उत्तराखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति किया गया है। गुरूवार को देहरादून के राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इससे पहले हाईकोर्ट की रजिस्टार जर्नल कहकशा खान ने नोटिफिकेशन जारी करके शपथ ग्रहण कार्यक्रम की जानकारी दी। कार्यक्रम में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और न्यायिक अधिकारी के साथ-साथ सरकारी अधिकारी और वरिष्ठ वकील भी मौजूद रहे। बता दें मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने की थी। 25 सितंबर 2024 के दिन राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति का आदेश जारी किया। वह इससे पहले 2015 में कर्नाटक के न्यायाधीश भी रह चुके हैं। इसके बाद साल 2023 में वह आंध्र प्रदेश के न्यायाधीश बने। मुख्य न्यायाधीश नरेंद्र आंध्र प्रदेश के उच्च न्यायालय में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश थे। न्यायाधीश बनने से पहले या यह कहें पदोन्नति से पहले वह कर्नाटक में उच्च न्यायालय में वकालत कर चुके हैं। बता दें कि इसी साल 10 अक्टूबर को उत्तराखंड की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रितु बाहरी सेवानिवृत हुई। इसके बाद वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज तिवारी कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का दायित्व संभाल रहे थे। इसके बाद अब गुहानाथन नरेंद्र को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बनाया गया है।
राष्ट्रपति की गई इस नियुक्ति की घोषणा को विधि एवं न्याय मंत्रालय के संयुक्त सचिव जगन्नाथ श्रीनिवासन की जारी अधिसूचना के माध्यम से की गई। पूर्व मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी 10 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो गई थी।  हालांकि सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति नरेंद्र को अगला मुख्य न्यायाधीश नामित किया गया था, लेकिन मंत्रालय की ओर से आधिकारिक अधिसूचना को लंबित रखा गया था। न्यायमूर्ति तिवारी का जन्म 19 सितंबर, 1965 को पिथौरागढ़ में हुआ था और वे वकीलों के परिवार से आते हैं। उनके पिता नंदाबल्लभ तिवारी और नाना राम दत्त चिलकोटी दोनों वकील थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय, पिथौरागढ़ से पूरी की और 1990 में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक, परास्नातक और एलएलबी की डिग्री हासिल की। उसी वर्ष उन्होंने उत्तर प्रदेश इलाहाबाद बार काउंसिल में दाखिला लिया और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस शुरू की। 2000 में उत्तराखंड के राज्य बनने के बाद उन्होंने अपनी प्रैक्टिस नैनीताल में उत्तराखंड उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था।

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