नई दिल्ली। दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने मेडिकल जांच कराने के लिए उनकी अंतरिम जमानत एक सप्ताह बढ़ाने की मांग वाली अर्जी सुनवाई के लिए तत्काल सूचीबद्ध करने से मना कर दिया है। केजरीवाल फिलहाल चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत पर हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक उन्हें दो जून को फिर समर्पण करना है और जेल जाना है। केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मेडिकल जांच कराने के लिए अंतरिम जमानत एक सप्ताह बढ़ाने का अनुरोध किया है।
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा अर्जी को तत्काल सुनवाई के लिए लगाए जाने की मांग ठुकराए जाने से आप नेता की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट में कोई भी अर्जी या याचिका रजिस्ट्री में दाखिल होती है। किसी भी अर्जी पर तत्काल सुनवाई के लिए एक पत्र संलग्न करके तत्काल सुनवाई का कारण भी बताना पड़ता है। इसके बाद रजिस्ट्रार व अन्य संबंधित अधिकारी पूरे मामले को देखते हुए केस को सूचीबद्ध करने का निर्णय लेते हैं।
आजकल सुप्रीम कोर्ट में गर्मी की छुट्टी चल रही है और अवकाशकालीन पीठें ही मुकदमों की सुनवाई के लिए बैठती हैं। इसके अलावा कई बार मौखिक रूप से न्यायाधीशों के समक्ष केस का उल्लेख किया जाता है और उनके निर्देश पर भी मामला सुनवाई पर लगाया जाता है। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने केजरीवाल की अर्जी को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार करते हुए कहा है कि मांग सुनवाई योग्य नहीं है।
रजिस्ट्री ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया है, जिसमें एक जून तक अंतरिम जमानत दी गई थी। साथ ही केजरीवाल को नियमित जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट में याचिका दाखिल करने की भी छूट दी गई थी। रजिस्ट्री का यह भी कहना है कि केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली मुख्य याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करके फैसला सुरक्षित रख चुका है। इस नई अर्जी का उस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
केजरीवाल की ओर से मंगलवार को भी न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और केवी विश्वनाथन की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष अंतरिम जमानत बढ़ाने की अर्जी का उल्लेख करते हुए उसे सुनवाई के लिए तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया था। लेकिन पीठ ने इस बारे में कोई आदेश नहीं दिया था और कहा था कि अर्जी प्रधान न्यायाधीश को भेजी जाएगी और वही उसे सुनवाई पर लगाने के बारे में निर्णय लेंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा भी अर्जी को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया गया है। ऐसे में केजरीवाल की राह मुश्किल हो गई है। अगर उन्हें इस बीच किसी अदालत से राहत नहीं मिली तो दो जून को जेल जाना होगा।
ईडी ने दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया था। केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी को वैध ठहराया था, जिसे केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई लंबित रहने के दौरान ही गत 10 मई को न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और दीपाकंर दत्ता की पीठ ने लोकसभा चुनाव को देखते हुए केजरीवाल को प्रचार के लिए एक जून तक अंतरिम जमानत दे दी थी। कोर्ट ने केजरीवाल को दो जून को दोबारा समर्पण करने का आदेश दिया था। इसके बाद 17 मई को कोर्ट ने केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर भी बहस सुन कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
अब केजरीवाल ने एक नई अर्जी दाखिल कर कहा है कि हिरासत के दौरान उनका वजन छह-सात किलो कम हो गया है। अचानक कम हुए वजन और थकान, चक्कर जैसी दिक्कतों के चलते डाक्टर ने उन्हें पूरे शरीर का पीईटी-सीटी स्कैन व कुछ अन्य जांचें कराने की सलाह दी है। केजरीवाल का कहना है कि पंजाब में चुनाव के चलते वह 30 मई तक प्रचार में व्यस्त रहेंगे। इसके बाद सिर्फ एक दिन मेडिकल जांच के लिए बचेगा, जबकि जो जांचें बताई गई हैं उनमें पांच-सात दिन लगेंगे। ऐसे में कोर्ट उनकी अंतरिम जमानत एक सप्ताह के लिए बढ़ा दे।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका
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