मथुरा: मथुरा में कृष्ण जन्मोत्सव का उत्साह चरम पर है। 400 से ज्यादा कलाकारों ने ब्रज की लोक संस्कृति का प्रदर्शन किया। जन्मस्थान मंदिर की सजावट में 221 किलो चांदी और सिंदूरी फूल का प्रयोग किया गया।
सरकार के प्रयासों से ब्रज की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को एक नई पहचान मिल रही है। मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव दिव्य और भव्य रूप में मनाया गया। पूरे ब्रज में भक्ति और उत्साह का ऐसा माहौल था कि शनिवार की रात 8 बजे तक ही 30 लाख से अधिक श्रद्धालु के मथुरा-वृंदावन पहुंचने का अनुमान रहा। यह संख्या 40 लाख से अधिक पहुंचने की उम्मीद है।
जन्मोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता, ब्रज की लोक कला और संस्कृति का व्यापक प्रदर्शन रहा। उत्सव को खास बनाने के लिए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा पूरे ब्रज क्षेत्र में 21 छोटे और 5 बड़े मंच बनाए गए थे। इन मंचों पर ब्रज क्षेत्र से आए करीब 400 कलाकारों की टोलियों ने रास, भजन, नृत्य और श्रीकृष्ण की जन्म लीलाओं का मनमोहक मंचन किया। इसके साथ ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान से जुड़े सभी रास्तों पर स्ट्रीट परफॉर्मर ग्रुप अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे। बीन, सारंगी, डमरू, ढप, ढोल, मजीरा और नगाड़े की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। बहरूपिया जैसे पारंपरिक कलाकार भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बने।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान का गर्भगृह इस उत्सव के लिए विशेष रूप से सजाया गया था। गर्भगृह को कारागार की तरह स्वरूप दिया गया था, जिसमें 221 किलो चांदी का इस्तेमाल किया गया। मंदिर की सजावट ”ऑपरेशन सिंदूर” की थीम पर की गई थी, जिसमें सिंदूरी रंग के फूलों का प्रयोग हुआ। ये फूल खासतौर पर कोलकाता और बंगलुरु से मंगाए गए थे। इस बार की जन्माष्टमी का एक और खास पहलू था काशी विश्वनाथ मंदिर से मथुरा में ठाकुर जी के लिए आए उपहार, जिनमें टॉफी, चॉकलेट और लड्डू शामिल थे, जो देश की सांस्कृतिक एकता को दर्शाते हैं। इस दिन ब्रज में ऐसी भीड़ उमड़ी कि भारत के कोने- कोने के अलावा कनाडा, रूस, अमेरिका, फ्रांस और नेपाल जैसे देशों से भी पर्यटक यहां पहुंचे।
दिव्य और भव्य कृष्ण जन्मोत्सव, 30 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे; काशी से भी आए उपहार
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