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Tuesday, August 11, 2026


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अनिल अंबानी के खिलाफ ईडी की नई कार्रवाई, SBI से जुड़े 2929 करोड़ के कथित धोखाधड़ी केस में दर्ज हुआ केस

नई दिल्ली: रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके समूह की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड (आरकॉम) के खिलाफ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) से जुड़े 2929 करोड़ रुपये के कथित ऋण धोखाधड़ी के मामले में नया केस दर्ज किया है। ईडी ने यह कदम सीबीआई की तरफ से दर्ज की गई शिकायत के आधार पर उठाया है। सीबीआई ने यह शिकायत 21 अगस्त को दर्ज की थी। ईडी ने अपना केस प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) के रूप में दर्ज किया है, जो पुलिस की एफआईआर के बराबर होता है।
सीबीआई ने 23 अगस्त को मुंबई स्थित आरकॉम के दफ्तरों और अनिल अंबानी के घर पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई एसबीआई की शिकायत पर की गई थी। शिकायत में कहा गया था कि रिलायंस कम्युनिकेशन और उसके अधिकारियों ने बैंकों से लिए गए लोन का गलत इस्तेमाल किया। सीबीआई की एफआईआर में अनिल अंबानी, रिलायंस कम्युनिकेशन, अज्ञात सरकारी कर्मचारी और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।
एसबीआई की शिकायत के अनुसार, 2018 तक आरकॉम पर कई बैंकों का कुल बकाया 40000 करोड़ रुपये से ज्यादा था। इसमें से एसबीआई का हिस्सा 2929.05 करोड़ रुपये था। बैंक का आरोप है कि कंपनी ने यह लोन चुकाने के बजाय गलत तरीके से अन्य जगहों पर इस्तेमाल किया, जिससे भारी नुकसान हुआ।
सीबीआई की कार्रवाई के बाद अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा था कि यह मामला 10 साल से ज्यादा पुराना है। उस समय अनिल अंबानी कंपनी के नॉन-एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर थे और कंपनी के दैनिक संचालन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। बयान में यह भी कहा गया था कि एसबीआई ने पहले ही पांच अन्य नॉन-एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई वापस ले ली है, लेकिन अनिल अंबानी को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है।
ईडी ने जुलाई में अनिल अंबानी के समूह की कुछ कंपनियों के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके बाद अगस्त के पहले हफ्ते में 66 वर्षीय अनिल अंबानी से पूछताछ की गई और उनका बयान दर्ज किया गया। ईडी की शुरुआती जांच में यह सामने आया कि अनिल अंबानी के समूह की कई कंपनियों ने 17,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन में वित्तीय गड़बड़ियां और गलत इस्तेमाल किया। इसमें रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर भी शामिल है। जांच में यह भी सामने आया कि यस बैंक ने 2017 से 2019 के बीच लगभग 3,000 करोड़ रुपये का लोन अंबानी समूह की कंपनियों को दिया था, जिसका गैरकानूनी तरीके से इस्तेमाल किया गया।

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