नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे पूर्व अग्निवीरों की निजी सुरक्षा एजेंसियों और प्रशिक्षण संस्थानों में भर्ती को सुनिश्चित करें, क्योंकि उनके पास सशस्त्र बलों में काम करने का अनुभव है। यह कदम पूर्व अग्निवीरों के करियर की प्रगति को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
जून 2022 में शुरू की गई अग्निपथ भर्ती योजना का उद्देश्य तीनों सेनाओं की आयु प्रोफाइल को कम करना था। इस योजना के तहत साढ़े 17 से 21 वर्ष के युवाओं को चार वर्षों के लिए सेना में भर्ती किया जाता है। इनमें से 25 प्रतिशत को 15 वर्षों तक बनाए रखने का प्रविधान है। अग्निवीरों का पहला बैच अगले वर्ष अपनी चार वर्षीय सेवा अवधि पूरी करेगा।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है सरकारी विभागों, बैंकों आदि की सुरक्षा प्रदाता एजेंसियों को अग्निवीरों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है। प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसीज रेगुलेशन एक्ट (पीएसएआरए) की धारा 10(3) के अनुसार, निजी सुरक्षा एजेंसियों को उन व्यक्तियों को प्राथमिकता देनी चाहिए जिन्होंने सेना, नौसेना, वायु सेना या अन्य सशस्त्र बलों में सेवा की है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि अग्निवीरों के पास लगभग चार वर्षों का सेवा अनुभव है, जिससे उन्हें निजी सुरक्षा गार्ड और पर्यवेक्षकों के रूप में नियुक्ति में प्राथमिकता दी जा सकती है। सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत रिक्तियों को भी आरक्षित किया है।
कई केंद्रीय सरकारी एजेंसियों और विभागों ने पहले ही पूर्व अग्निवीरों की भर्ती के लिए योजनाओं की घोषणा की है। कुछ राज्यों, जैसे हरियाणा और राजस्थान आदि ने अपने पुलिस बलों में अग्निवीरों के लिए आरक्षण का वादा किया है।
‘पूर्व अग्निवीरों की भर्ती सुनिश्चित करें…’, निजी सुरक्षा एजेंसियों को केंद्र का निर्देश
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