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Tuesday, May 26, 2026


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विदेशी एजेंसी ने बेनकाब किया पाकिस्तान का झूठ, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी ‘तबाही’

नई दिल्ली: भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान के सैन्य अड्डों और आतंकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। भारतीय सेना इसके सबूत पहले दे चुकी हैं। मंगलवार को मैक्सार टेक्नोलॉजीज ने पाकिस्तान में भारतीय सेना द्वारा की गई कार्रवाई की तस्वीरें जारी की हैं। मैक्सार टेक्नोलॉजीज द्वारा ली गई हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि पाकिस्तान के कई एयरबेस को काफी नुकसान पहुंचा है। तस्वीरों में चार पाकिस्तानी एयरबेस पर हुए को नुकसान दिखाया गया है। जिसमें रावलपिंडी में नूर खान एयरबेस, सरगोधा में पीएएफ बेस मुशफ, भोलारी एयर बेस और जैकोबाबाद में पीएएफ बेस शाहबाज शामिल हैं।

नूर खान एयरबेस, चकलाला, रावलपिंडी : 25 अप्रैल, 2025 और 10 मई, 2025 को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में एयरबेस सुविधाओं को नुकसान दिख रहा है। यह एयरबेस पाकिस्तान वायुसेना की लाइफलाइन है, इसे नूर खान एयरबेस के नाम से भी जाना जाता है। इसका नाम पाकिस्तानी वायुसेना के पूर्व प्रमुख एयर मार्शल नूर खान के नाम पर रखा गया है। ये ज्यादातर वीआईपी मूवमेंट और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह एयरबेस पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद महज 13 किलोमीटर रावलपिंडी के चकलाला में स्थित है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश के विमानों का हैंगर यही एयरबेस है। पाकिस्तानी संसद और प्रधानमंत्री निवास से इस एयरबेस की दूरी महज 20 किलोमीटर तो सेना प्रमुख के आवास से इस एयरबेस की दूरी महज 10 किलोमीटर है। जम्मू कश्मीर के पुंछ से इस एयरबेस की एरियल दूरी करीब 100 किलोमीटर है।
दूसरी तस्वीर में काफी नुकसान हुआ है, जो भारतीय वायुसेना की सटीकता को दर्शाता है। सरगोधा में पीएएफ बेस मुशफ को काफी नुकसान हुआ है। 30 अप्रैल, 2025 और 10 मई, 2025 को ली गई तस्वीरों से पता चलता है। मध्य पंजाब के सरगोधा शहर में स्थित इस एयरबेस को निशाना बनाना भारत का मास्टर स्ट्रोक रहा। यह पाकिस्तान का सबसे महत्वपूर्ण एयर बेस है। यहां कॉम्बैट कमांडर्स स्कूल, न्यूक्लियर डिलिवरी प्लेटफार्मों और विशिष्ट स्क्वाड्रन मौजूद हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 200 किमी अंतर स्थित इस एयरबेस को बेहद सुरक्षित माना जाता था। भारतीय मिसाइलों का यहां तक पहुंचना पाकिस्तान का मनोबल तोड़ने वाला रहा।
27 अप्रैल, 2025 और 11 मई, 2025 को ली गई भोलारी एयर बेस की सैटेलाइट तस्वीरों में भी रनवे और कुछ एयरबेस सुविधाओं में नुकसान हुआ दिख रहा है। हमलों में रनवे के एक हिस्से और एक संरचना को नुकसान पहुंचा। पाकिस्तान के नए बने एयरबेस में भोलारी एयरबेस भी शामिल है। इस एयरबेस का इस्तेमाल पाकिस्तानी वायुसेना के साथ उनकी नौसेना भी करती है। इस एरबेस को पाकिस्तान की भविष्य की रणनीतिक महत्वकांक्षाओं को दर्शाता था। इस एयरबेस के नुकसान से पाकिस्तान की समुद्री सुरक्षा पर भी असर पड़ा।
ये दक्षिणी वायु कमान के अंतर्गत, सिंध प्रांत के कराची और हैदराबाद के बीच स्थित जामशोरो जिले में एक सक्रिय ऑपरेशनल एयरबेस है। यह हाल ही में शुरू किया गया था और अब यहां 19 स्क्वाड्रन और ऑपरेशनल कन्वर्जन यूनिट तैनात हैं। यहां से एफ-16ए/बी ब्लॉक 15 एडीएफ फाइटर एयरक्राफ्ट संचालित किए जाते हैं। जैसलमेर से इसकी हवाई दूरी करीब 225 किलोमीटर है। जैकोबाबाद में पीएएफ बेस शाहबाज की 30 अप्रैल, 2025 और 11 मई, 2025 की तस्वीरों में एक संरचना को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त दिखाया गया है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जैकबाबाद शहर में यह आर्मी कैंट स्थिति है। इसका इस्तेमाल तीव्र सैन्य तैनाती के लिए किया जाता रहा है। राजस्थान के जैसलमेर से इस सैन्य ठिकाने की हवाई दूरी 250 किलोमीटर से ज्यादा है।

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