नई दिल्ली। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता लागत को संतुलित बनाए रखते हुए उच्च गुणवत्ता वाली अवसंरचना उपलब्ध कराना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अवसंरचना विकास की गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। श्री गडकरी ने नई दिल्ली में आयोजित सुरंग और पुल सम्मेलन 2026 के चौथे संस्करण को संबोधित करते हुए ये बात कही। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय राजमार्ग निर्माण कार्यों के उप-ठेकेदारी संबंधी मौजूदा प्रावधानों की समीक्षा करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संविदात्मक आवश्यकताओं का कड़ाई से पालन किया जाए और गुणवत्ता तथा समय पर निष्पादन की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से मुख्य ठेकेदार की ही रहे। श्री गडकरी ने कहा कि मंत्रालय पहले से ही ठेकेदारों का मूल्यांकन उनके प्रदर्शन के आधार पर कर रहा है। मंत्रालय ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट-डीपीआर तैयार करने वाले सलाहकारों पर भी यह प्रक्रिया लागू करना शुरू कर दिया है और निविदा पात्रता को इस प्रकार के प्रदर्शन मूल्यांकन से जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है।
श्री गडकरी ने बेहतर अवसंरचना सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए विस्तृत और मजबूत परियोजना रिपोर्ट-डीपीआर की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि खराब गुणवत्ता वाली डीपीआर और अपर्याप्त भूवैज्ञानिक डेटा अक्सर लागत में वृद्धि, देरी और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का कारण बनते हैं। हिमालयी भूभाग में निर्माण की चुनौतियों का उल्लेख किया गया। इनमें भूस्खलन, प्रतिकूल मौसम, प्राकृतिक आपदाएं और लॉजिस्टिक संबंधी कठिनाइयां शामिल हैं। श्री गडकरी ने कहा कि हिमालय में सुरंगों और पुलों का निर्माण काली चट्टानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने विफलताओं को रोकने के लिए प्रीकास्ट पद्धति, उन्नत टनल बोरिंग मशीनों, बेहतर सर्वेक्षण और निगरानी तथा प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के महत्व का उल्लेख किया। मंत्रालय 2 से ढाई लाख करोड़ रुपये की सुरंग परियोजनाओं के लिए निविदाएं तैयार कर रहा है।
















