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Friday, August 14, 2026


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9 महीनों में 723 माओवादियों ने किया सरेंडर, 202 मारे गए तो 812 पहुंचे सलाखों के पीछे

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय की रणनीति से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिल रही है। इस साल अभी तक 9 महीने में लाल आतंक पर बड़ा वार किया गया है। सितंबर तक 723 माओवादियों ने सरेंडर कर दिया है। इसके अलावा सुरक्षा बलों की मुठभेड़ में 202 नक्सली मारे गए हैं, वहीं 812 नक्सली गिरफ्तार किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि 2026 तक नक्सलियों का पूर्ण सफाया कर दिया जाएगा। यानी देश में उस वक्त तक कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं बचेगा, जहां पर नक्सली गतिविधियां दिखाई दें।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सोमवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्लूई) से प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। बैठक में आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भाग लेंगे। साथ ही वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने में राज्यों का सहयोग कर रहे केन्द्रीय मंत्रालयों के 5 केन्द्रीय मंत्री और उच्चाधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में भाग लेंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केन्द्र सरकार, मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने के प्रति कटिबद्ध है। केन्द्र सरकार वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित सभी राज्यों को इस समस्या से निपटने में हरसंभव सहायता दे रही है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ इस तरह की पिछली समीक्षा बैठक की अध्यक्षता 06 अक्टूबर, 2023 को की थी। उस बैठक में गृह मंत्री ने वामपंथी उग्रवाद को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक दिशा निर्देश दिये थे। मोदी सरकार की रणनीति से वर्ष 2010 के मुक़ाबले 2023 में हिंसा में 72% और मृत्यु में 86% कमी आई है।
आज वामपंथी उग्रवाद अपनी अंतिम लड़ाई लड़ रहा है। वर्ष 2024 में सुरक्षाबलों को नक्सलियों के विरुद्ध आशातीत सफलता मिली है। इस वर्ष अब तक 202 नक्सली मारे गए हैं और 2024 के शुरूआती 09 महीनों में 723 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इसके साथ ही, 2024 में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या मात्र 38 रह गई है। केन्द्र सरकार ने वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों के दूरदरा के इलाकों तक विकास योजनाएं पहुंचाने के लिए भी ठोस कदम उठाए हैं। इन क्षेत्रों में सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी पर विशेष बल दिया जा रहा है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 14,400 किलोमीटर सड़क निर्माण हो चुका है और करीब 6000 मोबाइल टावर लगाए जा चुके हैं।

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