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Saturday, July 18, 2026


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पुतिन-ट्रंप की मुलाकात का भारत ने किया स्वागत

नई दिल्ली। 15 अगस्त को अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली मुलाकात का भारत ने स्वागत किया है। भारत ने यह भी कहा है कि वह अपने स्तर पर इस बैठक में मदद करने को तैयार है।भारत का यह बयान पीएम नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच टेलीफोन पर हुई वार्ता के बाद आया है। दोनों नेताओं के बीच शुक्रवार को टेलीफोन पर बात हुई थी। उसी दिन अमेरिका और रूस में सहमति बनी थी कि उनके नेताओं के बीच यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए आमने-सामने बैठक होगी।
अमेरिका और रूस के बीच यूक्रेन विवाद को लेकर बनी सहमति का असर अमेरिका की तरफ से उस पर लगाए गए शुल्क पर भी होगा। ऐसी सहमति के बाद भारत पर रूसी तेल खरीदने की वजह से लागू ट्रंप का 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ हटने का रास्ता साफ हो जाएगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर पहले 25 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क लगाया। इसके बाद रूस से तेल खरीदने का आरोप लगाते हुए 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया। भारत ने इन दोनों फैसलों का बेहद कड़े शब्दों में प्रतिकार किया।
रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाए गए शुल्क से संबंधित जिस अध्यादेश पर राष्ट्रपति ट्रंप ने हस्ताक्षर किया है, उसमें इस बात का उल्लेख है कि रूस और अमेरिका के बीच सामंजस्य बनने की स्थिति में अतिरिक्त शुल्क में संशोधन किया जा सकता है।बताते चलें कि अमेरिका से व्यापार वार्ता के दौरान भारत ने ट्रंप प्रशासन के किसी दबाव के आगे घुटने नहीं टेका है।भारतीय विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि अलास्का में 15 अगस्त की बैठक के लिए अमेरिका और रूस के बीच बनी सहमति का हम स्वागत करते हैं।यह बैठक यू्क्रेन में जारी विवाद को समाप्त करने और शांति की राह खोलने की उम्मीद जगाता है। जैसा कि पीएम नरेन्द्र मोदी ने कई बार कहा है कि यह युद्ध का समय नहीं है। इसलिए भारत इस बैठक का स्वागत करता है और अपनी तरफ से इस कोशिश में मदद करने को तैयार है।
सनद रहे कि एक दिन पहले ही पुतिन ने मोदी से बात की थी और उन्हें यूक्रेन विवाद की ताजा स्थिति पर जानकारी दी थी। यूक्रेन और रूस के बीच फरवरी, 2022 से युद्ध हो रहा है और भारत तभी से इसका समाधान कूटनीति और बातचीत से करने का समर्थक रहा है।
पीएम मोदी विश्व के एकमात्र नेता हैं, जो राष्ट्रपति पुतिन के साथ ही यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर जेलेंस्की के साथ भी संपर्क में हैं। मोदी ने पिछले वर्ष रूस की यात्रा के बाद यूक्रेन की भी यात्रा की थी। इसके बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर आरोप लगाया है कि वह रूसी तेल खरीद कर पुतिन सरकार को धन दे रहे हैं, ताकि वह यूक्रेन पर हमला करे। दूसरी तरफ भारत का कहना है कि अमेरिका और पश्चिमी देशों का यह आरोप असंगत और अन्यायपूर्ण है। खुद अमेरिका और यूरोपीय देश अपनी जरूरत की चीजें रूस से खरीद रहे हैं, जबकि भारत को उपदेश दे रहे हैं।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भारत से आग्रह किया है कि वह यूक्रेन युद्ध समाप्त करने में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मदद के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे। उन्होंने यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बातचीत के कुछ ही घंटों बाद कही।
ग्राहम ने कहा कि यह वाशिंगटन और दिल्ली के बीच संबंधों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर लिखा-जैसा कि मैं भारत में अपने दोस्तों से कहता रहा हूं, भारत-अमेरिका संबंधों को बेहतर बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम जो वे कर सकते हैं, वह है यूक्रेन में रक्तपात को समाप्त करने में राष्ट्रपति ट्रंप की मदद करना। भारत रूस से सस्ते तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, जो पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन देता है।

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