नई दिल्ली। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की ऐतिहासिक सफलता का वैश्विक स्तर पर जमकर सराहना हो रही है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर(पीएफबीआर) ने सफलतापूर्वक काम करना शुरू कर दिया है। यह भारत के तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की महत्वपूर्ण शुरुआत है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल ग्रासी ने भारत के इस उपलब्धि की जमकर प्रशंसा की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बधाई देते हुए कहा कि यह कदम ईंधन की स्थिरता और परमाणु ऊर्जा के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने भी इसे एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि बताया है।
आईईए ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कई वर्षों के विकास के बाद हासिल की गई इस महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि के लिए भारत, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वैज्ञानिकों व इंजीनियरों को बधाई। भारत अब दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन गया है जिसके पास यह खास तकनीक है।
रूस के अलावा अभी तक कोई भी देश इसे सफलतापूर्वक नहीं चला पाया है। अमेरिका और जापान जैसे देशों ने भी दशकों पहले इस जटिल तकनीक में महारत हासिल करने की कोशिशें छोड़ दी थीं।
परमाणु कचरा कम करने में भी मिलेगी मदद
यह रिएक्टर छह अप्रैल को रात 8:25 बजे चालू हुआ। इसमें ईंधन के रूप में प्लूटोनियम आधारित मिक्स्ड आक्साइड का इस्तेमाल होता है। रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए तरल सोडियम का प्रयोग किया जाता है।
यह अन्य रिएक्टरों के मुकाबले बहुत कम ईंधन खर्च करता है। खास बात यह है कि यह पुराने रिएक्टरों से निकले कचरे का इस्तेमाल ईंधन के रूप में करेगा। इससे परमाणु कचरा कम करने में भी मदद मिलेगी।
यह सफलता भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक होमी जहांगीर भाभा के सपने को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे भविष्य में थोरियम आधारित रिएक्टरों को चलाने का रास्ता साफ होगा। यह भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारत सरकार ने परमाणु ऊर्जा से 100 गीगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य रखा है।अभी भारत की क्षमता 8.7 गीगावाट है। उम्मीद है कि साल 2031-32 तक यह बढ़कर 22.48 गीगावाट हो जाएगी। इस रिएक्टर को भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम ने विकसित किया है। आने वाले महीनों में वैज्ञानिक इस पर कई प्रयोग करेंगे और फिर इसे बिजली ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा।
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की उपलब्धि की दुनिया भर में हो रही सराहना
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