नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिफऱ् एक टेक्नोलाजी स्टोरी नहीं है। यह एक पावर स्टोरी है। जैसे-जैसे देश एडवांस्ड एआई सिस्टम बनाने की रेस में आगे बढ़ रहे हैं, वे इनोवेशन और गवर्नेंस के प्रतिस्पर्धा वाले मॉडल भी बना रहे हैं। अमेरिका टेक स्पीड और बाजार प्रभुत्व पर दांव लगा रहा है। चीन एआई को देश की रणनीति में शामिल कर रहा है और इसके जरिये निगरानी की क्षमता बढ़ा रहा है। अब सर्वम एआई के लांच के साथ भारत एक अलग सोच के साथ आगे बढ़ रहा है।
बहुभाषी, संप्रभु एआई जिसका मकसद प्रभाव के साथ-साथ समावेशन भी है। आईए जानते हैं कि विश्व की तीन प्रमुख शक्तियां अगल-अलग सोच के साथ भविष्य की डिजिटल व्यवस्था को कैसे आकार दे रहीं हैं?
अमेरिका में ओपेनएआई, गूगल, माइक्रोसाफ्ट और मेटा के साथ बड़ी टेक कंपनियों का दबदबा है। ये एआई की दौड़ में सबसे आगे हैं क्योंकि उनके पास बहुत बड़ा कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और निजी क्षेत्र की पूंजी है।
एआई लीडरशिप में नियम कानून की बाधाओं को दूर करने के मकसद से जारी किया गया एग्जीक्यूटिव आर्डर 14179 जैसे नीतिगत कदम, इनोवेशन और प्रतिस्पर्धा की क्षमता को बढ़ाने पर जोर देते हैं। अमेरिका का एआई माडल तेजी से डेवलपमेंट, लचीले रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और ग्लोबल पार्टनरशिप को प्राथमिकता देता है।
निजी क्षेत्र की तेजी ने एआई को इस स्तर तक पहुंचाया है, जहां एआइ प्रोडक्ट का इस्तेमाल अरबों लोग कर रहे हैं लेकिन इसने एआई के सही इस्तेमाल और जवाबदेही के बारे में सवालों को जन्म दिया है। एआई के जरिये दुनिया में प्रभाव बढ़ा रहा चीन इसके उलट चीन की एआई रणनीति देश के रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने वाली है।
चीन ने अपनी एआइ रणनीति के लिए 100 अरब डॉलर से अधिक निवेश किया है ताकि अमेरिका को टक्कर दे सके। चीन की रणनीति मैन्युफैक्च¨रग, गवर्नेंस, रोबोटिक्स और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में एप्लाइड एआई पर फोकस करती है और अपनी बड़ी आबादी और डाटा रिसोर्स का इस्तेमाल करती है।
इससे रिसर्च के क्षेत्र में शानदार नतीजे आ रहे हैं और एआई उत्पाद तेजी से लागू के उपयोग में आ रहे हैं लेकिन यह रणनीति खुले बाजार के बजाय सरकार के नियंत्रण और राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने पर जोर देती है।
सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से निपटने पर भारत का जोर
एआई पावर के लिए भारत का रास्ता अलग है। एआई रिसर्च या सावरेन माडल में ग्लोबल लीडर न होने के बावजूद भारत वैश्विक एआइ परि²श्य में तेजी खुद को तीसरे ध्रुव के के तौर पर स्थापित कर रहा है। स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल के अनुसार प्रतिभा, व्यावसायीकरण और नीतियों के स्तर पर तेज ग्रोथ के साथ भारत भारत अमेरिका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर है।
इंडियाएआई मिशन का मकसद सबके लिए एआई की उपलब्धता सुनिश्चित करना, कई भाषाओं और घरेलू जरूरतों के लिए समावेशी तंत्र बनाना और सामाजिक- आर्थिक चुनौतियों से निपटना है।
भारत की एआई रणनीति सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर आधारित है और क्षमता विकास पर फोकस करती है। यह माडल वैश्विक निवेश भी आकर्षित कर रहा है गूगल और माइक्रोसाफ्ट भारत में अरबों डालर के बड़े डाटा सेंटर और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर बना रहे हैं।
भारत के AI मॉडल का दुनियाभर में बोलबाला, अमेरिका-चीन से भी ज्यादा मजबूत सिस्टम
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