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Sunday, August 9, 2026


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सबका बीमा सबकी रक्षा: 100% एफडीआई को मिली मंजूरी, 87 साल पुराने नियमों में बदलाव के लिए बिल लोकसभा में पास

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में बहुप्रतीक्षित ‘सबका बीमा सबकी रक्षा विधेयक 2025 पेश किया। जिसे सदन की ओर से पारित कर दिया गया। वित्त मंत्री ने यह विधेयक पेश करते हुए बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश और घरेलू कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाने का हवाला दिया। यह विधेयक में तीन प्रमुख कानूनों- बीमा अधिनियम (1938), जीवन बीमा निगम अधिनियम (1956) और बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण अधिनियम (1999) में व्यापक संशोधन का प्रस्ताव है।
विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “आम लोगों का बीमा हमेशा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता रही है और केंद्र सरकार ने कोविड महामारी के दौरान भी समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों को बीमा प्रदान किया है।” सदन में प्रस्तावित संशोधनों को स्वीकार करते हुए विधेयक को पारित कर दिया गया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि संसद में पेश किए गए विधेयक के माध्यम से लाए गए बीमा सुधारों से लोगों को बीमा तक अधिक पहुंच मिलेगी, बेहतर नियामक निगरानी होगी और अनुपालन में आसानी सुनिश्चित होगी। ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक, 2025’ को लोकसभा में विचार के लिए पेश करते हुए, सीतारमण ने कहा कि इस मसौदा कानून का उद्देश्य पारदर्शिता लाना, अनुपालन अनिवार्यताओं को आसान बनाना और इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ाना है।
मंत्री ने कहा कि बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 2015 में 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत, 2021 में 74 प्रतिशत कर दी गई थी और अब इसे 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। सीतारमण ने कहा, “इनसे बीमा क्षेत्र को काफी बढ़ावा मिला है। बीमा कंपनियों की संख्या 2014 में 53 से बढ़कर अब 74 हो गई है।”
उन्होंने कहा कि बीमा की पहुंच 2014-15 में 3.3 प्रतिशत से बढ़कर अब 3.8 प्रतिशत हो गई है और बीमा घनत्व या प्रति व्यक्ति एक वर्ष में भुगतान किया जाने वाला औसत बीमा प्रीमियम 2014 में 55 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर अब 97 अमेरिकी डॉलर हो गया है। मंत्री ने कहा कि भुगतान किया गया कुल बीमा प्रीमियम 2014-15 में 4.15 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 11.93 लाख करोड़ रुपये हो गया है और प्रबंधन के तहत संपत्ति 24.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 74.4 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इस बीच, राज्यसभा ने Appropriation (No. 4) Bill 2025 को चर्चा के बाद लोक सभा को वापस कर दिया गया। संविधान के अनुसार मनी बिल केवल लोक सभा में पेश होता है और राज्यसभा इसे अस्वीकार नहीं कर सकती, केवल चर्चा करने के बाद लौटाती है।

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