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Thursday, February 19, 2026


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पाकिस्तान में चल रहे हैं ISIS के ट्रेनिंग सेंटर, अफगान सैन्य विशेषज्ञों का दावा

काबुल: अफगानिस्तान के सैन्य विश्लेषकों ने गंभीर आरोप लगाया है कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के प्रशिक्षण केंद्र पाकिस्तान में संचालित हो रहे हैं। यह दावा ऐसे समय में किया गया है जब पाकिस्तान लगातार यह कहता आया है कि उसकी जमीन पर कोई आतंकी संगठन सक्रिय नहीं है।
हाल ही में पाकिस्तान के पेशावर शहर में आईएसआईएस-खुरासान (आईएसआईएस-के) के एक बड़े सदस्य नुसरत उर्फ पहलवान मूसा और अबू जार की हत्या हुई है। यह घटना एक बार फिर इस बात पर सवाल उठाती है कि क्या आईएसआईएस वास्तव में पाकिस्तान में सक्रिय है। सूत्रों के अनुसार, नुसरत ने 2022 और 2023 में काबुल में हुए कई हमलों की साजिश रची थी और पाकिस्तान में आईएसआईएस के पहलवान सेंटर का संचालन करता था।
अफगान सुरक्षा एजेंसियों ने एक और आईएसआईएस आतंकी सईदुल्लाह को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने पाकिस्तान के क्वेटा इलाके में हथियार और विचारधारा की ट्रेनिंग ली थी और तोर्खम सीमा के रास्ते फर्जी पहचान पत्र के सहारे अफगानिस्तान में प्रवेश किया। तालिबान प्रशासन ने उसका एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें वह कहता है, ‘मैंने पाकिस्तान के क्वेटा में पहाड़ों के बीच ट्रेनिंग ली। वहां मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की गई ताकि मैं संगठन के लिए काम करूं।’
इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान पर फिर से यह आरोप तेज हो गया है कि वह आतंकवादी संगठनों को पनाह और समर्थन देता है। अफगान सैन्य विश्लेषक सरवर नियाजी ने कहा, ‘पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवादी समूहों को अपनी जमीन पर ट्रेनिंग देकर पड़ोसी देशों, खासकर अफगानिस्तान भेजता आया है।’ अमेरिका के पूर्व अफगान शांति दूत जल्मय खलीलजाद ने भी पुष्टि की कि काबुल हमलों की साजिश रचने वाला एक प्रमुख आईएसआईएस-के सदस्य पेशावर में मारा गया। उन्होंने पाकिस्तान से दोहराई गई अपील की है कि वह इस संगठन को आश्रय देना बंद करे।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईएसआईएस का खतरा सिर्फ अफगानिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। राजनीतिक विश्लेषक अजीज मारेज ने कहा, ‘पाकिस्तान क्षेत्र में आतंकवाद का सबसे बड़ा उत्पादक है।’ वहीं निसार अहमद शेरजाद ने आगे कहा, ‘पाकिस्तान में आईएसआईएस नेताओं की मौत यह साबित करती है कि संगठन के प्रशिक्षण केंद्र वहीं मौजूद हैं।’
इस साल 22 जनवरी को अफगानिस्तान की सुरक्षा और क्लियरेंस केंद्रीय आयोग ने दावा किया था कि नए भर्ती किए गए आईएसआईएस लड़ाकों को कराची और इस्लामाबाद से बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के इलाकों में बने शिविरों में भेजा जा रहा है, जहां उन्हें प्रशिक्षण देकर अफगानिस्तान और अन्य देशों में हमलों के लिए तैयार किया जाता है।

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