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Thursday, July 30, 2026


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हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में बनेगी NIA की अदालत, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए उसने प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में एक समर्पित एनआइए अदालत स्थापित करने का निर्णय लिया है।
साथ ही, उन स्थानों पर एक से अधिक अदालत स्थापित करने का निर्णय लिया गया है जहां आतंकवाद विरोधी कानून के तहत 10 से अधिक मामले लंबित हैं। दिल्ली सरकार ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ को यह भी बताया कि संगठित अपराध और आतंकी मामलों से निपटने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में 16 विशेष अदालतें बनाई जा रही हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और दिल्ली सरकार से विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच किसी भी क्षेत्राधिकार संबंधी संघर्ष से बचने के लिए पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए मकोका जैसा एक कड़ा संगठित अपराध विरोधी कानून लागू करने की संभावना तलाशने को कहा है। एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों में कई मामलों में आरोपित गैंग्सटर महेश खत्री का संज्ञान लेते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि संगठित अपराध में शामिल शातिर अपराधी एनसीआर में क्षेत्राधिकार संबंधी मुद्दों का अनुचित लाभ उठाते हैं और कानून से बच निकलते हैं।
महेश खत्री सुनवाई में देरी के आधार पर जमानत के लिए अदालत में पेश हुआ था। पीठ ने कहा, ”कभी-कभी अपराध ‘ए’ राज्य में घटित होता है और अपराधी ‘बी’ राज्य में चला जाता है। लेकिन, त्वरित जांच के लिए किस न्यायालय या एजेंसी को मामले का संज्ञान लेना चाहिए, या किन न्यायालयों के पास सक्षम क्षेत्राधिकार होगा – यह आपराधिक मुकदमे में एक मुद्दा बन जाता है।”
सर्वोच्च न्यायालय खत्री और कैलाश रामचंदानी की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। कैलाश रामचंदानी महाराष्ट्र के गढ़चिरोली का रहने वाला एक माओवाद समर्थक है, जिसे 2019 में आइईडी विस्फोट में 15 पुलिसकर्मियों की मौत के बाद नामजद किया गया था।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अंतत: इसका लाभ कुख्यात अपराधियों को ही मिलता है, जो समाज या राष्ट्र के हित में नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा, ”ऐसा प्रतीत होता है कि इस मुद्दे पर विचार करने की आवश्यकता है, जिसमें एनसीआर क्षेत्र में मौजूदा कानूनी ढांचे के प्रभावी उपयोग के लिए प्रभावी कानूनों के निर्माण की वांछनीयता भी शामिल है।” खत्री मामले में कई एफआइआर का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति बागची ने अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी (केंद्र) और एसडी संजय (दिल्ली सरकार) को बताया कि वे ऐसे मामलों में एनआइए अधिनियम लागू करने की संभावना तलाश सकते हैं, जहां विभिन्न राज्यों में कई एफआइआर दर्ज हों। उन्होंने कहा कि एनआइए के पास सभी जांचों को अपने हाथ में लेने की सर्वोच्च शक्ति है, विशेष रूप से संगठित अपराध के मामलों में।

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