नई दिल्ली। केंद्र सरकार के एनपीएस कर्मचारी, ‘एकीकृत पेंशन योजना’ (यूपीएस) में शामिल होने के लिए राजी नहीं हैं। पिछले साल केंद्र के एनपीएस कर्मियों को यूपीएस में शामिल होने के लिए तीन बार विकल्प दिया गया था। इसके बावजूद 26.46 लाख एनपीएस कर्मियों में से केवल 1.3 लाख कर्मचारियों ने ही यूपीएस चुना है।
केंद्र सरकार के एनपीएस कर्मचारी, ‘एकीकृत पेंशन योजना’ (यूपीएस) में शामिल होने के लिए राजी नहीं हैं। पिछले साल केंद्र के एनपीएस कर्मियों को यूपीएस में शामिल होने के लिए तीन बार विकल्प दिया गया था। इसके बावजूद 26.46 लाख एनपीएस कर्मियों में से केवल 1.3 लाख कर्मचारियों ने ही यूपीएस चुना है। नई भर्ती से आए 1749 कर्मचारी और 17463 रिटायर्ड कर्मी भी यूपीएस में शामिल हुए हैं। ‘पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी’ (पीएफआरडीए) ने 27 जनवरी को ‘आरटीआई’ के जवाब में यह जानकारी दी है।
बता दें कि केंद्र सरकार ने गत वर्ष एक अप्रैल से ‘यूपीएस’ को लागू किया था। प्रारंभ में एनपीएस वाले केंद्रीय कर्मियों को 30 जून तक यूपीएस का विकल्प चुनने का समय दिया गया। जब इसके नतीजे उत्साहवर्धक नहीं रहे तो सरकार ने आखिरी तिथि को 30 सितंबर तक बढ़ा दिया। उसके बाद भी
एनपीएस कर्मचारी, यूपीएस में आने के लिए राजी नहीं हुए। कर्मचारियों की एक ही मांग थी कि उनके लिए पुरानी पेंशन ‘ओपीएस’ बहाल की जाए। पीएफआरडीए ने पिछले साल 22 अक्तूबर को आरटीआई के जवाब में बताया था कि 14 अक्तूबर तक 24 लाख एनपीएस कर्मियों में से मात्र 97094 ने यूपीएस का विकल्प चुना था। वित्त राज्य मंत्री ने 28 जुलाई 2025 को लोकसभा में बताया था कि 20 जुलाई तक 31,555 कर्मचारियों ने ही यूपीएस को चुना है। यह आंकड़ा, कुल पात्र केंद्रीय कर्मचारियों का सिर्फ 1.37 प्रतिशत रहा। 24 सितंबर तक महज 70670 एनपीएस कर्मियों ने यूपीएस में शामिल होने का विकल्प चुना। इनमें सिविल डिपार्टमेंट के 21366, डाक विभाग के 9996, टेलीकॉम के 130, रेलवे के 18024 और डिफेंस सिविल सेक्टर के 7058 कर्मचारियों ने यूपीएस का विकल्प चुना। इसके बाद यूपीएस चुनने की आखिरी तिथि 30 नवंबर तक बढ़ा दी गई।
मीडिया प्रमुख विनायक चौथे का कहना है कि यूपीएस, फेल साबित हुई है। तीन बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद अभी तक महज चार फीसदी कर्मचारियों ने ही यूपीएस का विकल्प चुना है। फिलहाल पीएफआरडीए ने आरटीआई के तहत जो सूचना मुहैया कराई है, वह चौकाने वाली है। केंद्र सरकार में चार जनवरी के डेटा के अनुसार, 2646205 कर्मचारी एनपीएस में हैं। 18 जनवरी तक 103735 सेवारत कर्मियों ने यूपीएस का विकल्प चुना है। इनमें सिविल डिपार्टमेंट के 41350, डाक विभाग के 19281, टेलीकॉम के 360, रेलवे के 30836 और डिफेंस सेक्टर के 11881 कर्मियों ने यूपीएस चुना है।
अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ के महासचिव सी. श्रीकुमार कहते हैं कि सरकार ने यूपीएस को एक वैकल्पिक अंशदायी पेंशन मॉडल के रूप में पेश किया था। इसमें शामिल होने की समय सीमा को सरकार, तीन बार बढ़ा चुकी है। केंद्रीय कर्मचारियों की एक ही मांग, गैर-अंशदायी और वैधानिक पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की पूर्ण बहाली की है। कर्मचारियों ने यूपीएस में जाने की स्पष्ट अनिच्छा व्यक्त की है।
26.46 लाख NPS कर्मियों में से केवल एक लाख ने चुना UPS, इनमें नई भर्ती से 1749 तो 17463 रिटायर्ड पर्सन
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