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Saturday, August 29, 2026


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‘ऑपरेशन सिंदूर नागरिक और सैन्य तंत्र के बेहतरीन तालमेल का शानदार उदाहरण: रक्षा मंत्री

नई दिल्ली/मसूरी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर नागरिक और सैन्य तंत्र के बेहतरीन तालमेल का शानदार उदाहरण है। उनके मुताबिक, इस ऑपरेशन में प्रशासन और सेना ने मिलकर अहम जानकारी लोगों तक पहुंचाई और उनमें भरोसा पैदा किया। राजनाथ सिंह उत्तराखंड के मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में 100वें सामान्य आधारभूत पाठ्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
राजनाथ सिंह ने युवा लोक सेवकों से कहा कि वे देश के हितों की रक्षा में अपनी अहम जिम्मेदारी समझें और कठिन परिस्थितियों में भी सैनिकों की तरह हमेशा तैयार रहें। उन्होंने दोहराया कि ऑपरेशन सिंदूर में प्रशासनिक मशीनरी और सेना ने बिना किसी बाधा के काम किया और जनता तक जरूरी जानकारी पहुंचाई, जिससे लोगों में भरोसा बढ़ा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को ‘संतुलित और स्थिति न बढ़ाने वाले तरीके’ से नष्ट किया। लेकिन पड़ोसी देश के व्यवहार ने सीमा पर हालात को सामान्य होने नहीं दिया। रक्षा मंत्री ने सैनिकों की बहादुरी की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों ने भी जरूरी सूचनाएं साझा करके और देशभर में मॉक ड्रिल करवाकर बहुत अहम भूमिका निभाई। राजनाथ सिंह ने कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लिए शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच तालमेल और बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ और ‘सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन’ के मंत्र का जिक्र किया और कहा कि भारत को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने में लोक सेवकों की भूमिका बहुत अहम है। उन्होंने कहा कि 2014 में जब (भाजपा के नेतृत्व वाली) सरकार बनी थी, तब भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। पिछले 9–10 वर्षों में भारत चौथे नंबर पर पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि मॉर्गन स्टेनली जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था भी कह रही है कि भारत अगले दो–तीन साल में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि लोकजनता के सेवक हैं, शासक नहीं। उनका व्यवहार ईमानदारी और निष्पक्षता से भरा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकसेवकों के काम में ऐसी संस्कृति दिखनी चाहिए, जहां ईमानदारी कोई विशेष नहीं, बल्कि रोजमर्रा का सामान्य हिस्सा हो। उन्होंने कहा कि यह तकनीक का दौर है और नए अधिकारी जनता की समस्याओं का हल तलाशने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करें। तकनीक से लोगों तक पहुंच बढ़ेगी, पारदर्शिता आएगी और सभी वर्गों को लाभ मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि लोक सेवकों को हर नागरिक से सहानुभूति और समझ के साथ मिलना चाहिए। गरीब और कमजोर वर्गों से बात करते समय यह समझना चाहिए कि उनकी कठिनाइयां केवल उनकी अपनी कोशिशों की वजह से नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों की वजह से भी होती हैं। राजनाथ सिंह ने लोक सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस बार की संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में एक महिला ने पहला स्थान हासिल किया है और शीर्ष पांच में से तीन महिलाएं हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि 2047 तक कई महिलाएं कैबिनेट सचिव के पद तक पहुंचेंगी और भारत के विकास में बड़ी भूमिका निभाएंगी।

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