नई दिल्ली: रिलायंस से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का संचालन करने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण संकेत दिया। कंपनी ने कहा है कि यदि गैर-अमेरिकी खरीदारों क्रूड बेचने की अनुमति मिलती है, तो वह वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू करने पर विचार करेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में वेनेजुएला और अमेरिका के बीच सीमित तेल निर्यात को लेकर सहमति बनी है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के एक प्रवक्ता ने रॉयटर्स को दिए एक जवाब में कहा, “हम गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए वेनेजुएला के तेल तक पहुंच को लेकर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं और नियमों का अनुपालन करते हुए तेल खरीदने पर विचार करेंगे”। वेनेजुएला संकट और रूस से तेल खरीदारी के विवाद के बीच कंपनी का यह रुख बताता है कि वह भू-राजनीतिक प्रतिबंधों और अमेरिकी नीतियों के दायरे में रहकर ही कोई कदम उठाएगी।
मीडिया रिपोर्ट्स में किए गए दावों के अनुसार इस सप्ताह काराकस और वाशिंगटन के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके तहत वेनेजुएला को संयुक्त राज्य अमेरिका को 2 अरब डॉलर तक का कच्चा तेल (लगभग 30-50 मिलियन बैरल) निर्यात करने की अनुमति दी गई है। यह कूटनीतिक बदलाव 3 जनवरी को अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बाद आया है। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अन्य देशों को भी वेनेजुएला से तेल खरीदने की छूट मिलेगी।
रिलायंस के लिए वेनेजुएला ऐतिहासिक रूप से कच्चे तेल का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। हालांकि, मार्च 2025 में कंपनी ने वेनेजुएला से तेल खरीदना बंद कर दिया था। इसका कारण अमेरिका द्वारा उन देशों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा थी जो दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र से क्रूड खरीद रहे थे। रिलायंस को वेनेजुएला के तेल की आखिरी खेप मई में मिली थी।
रिलायंस के लिए वेनेजुएला का तेल काफी फायदेमंद साबित होता है। गुजरात में स्थित रिलायंस की दो रिफाइनरियों की कुल प्रसंस्करण क्षमता लगभग 1.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। इन संयंत्रों की जटिलता उन्हें वेनेजुएला के सस्ते और भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम बनाती है।
भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता रिलायंस को अपने ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) को बेहतर बनाने में मदद करती है, क्योंकि यह हल्का तेल के मुकाबले डिस्काउंट पर उपलब्ध होता है। फिलहाल रिलायंस की नजर अमेरिकी सरकार के अगले कदम पर है। यदि वाशिंगटन गैर-अमेरिकी कंपनियों को प्रतिबंधों में ढील देता है, तो रिलायंस जैसी भारतीय रिफाइनरीज के लिए कच्चे तेल की सोर्सिंग में विविधता लाने और लागत कम करने का एक पुराना रास्ता फिर से खुल सकता है।
वेनेजुएला से फिर तेल खरीदेगी रिलायंस, कंपनी बोली- मंजूरी और नियमों में स्पष्टता का है इंतजार
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