नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि देश की पचास प्रतिशत आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और नीति निर्माण में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व देना समय की मांग है। श्री मोदी ने आज लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संवैधानिक संशोधन से संबंधित तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान ये बात कहीं। ये तीन विधेयक हैं दृ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026, परिसीमन विधेयक-2026 और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक-2026.प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी को भी अहंकारपूर्ण भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि वे भारत की महिलाओं को कुछ दे रहे हैं, बल्कि यह उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि समूची राजनीतिक व्यवस्था दशकों से इस अधिकार को महिलाओं से छीनने की सामूहिक रूप से दोषी है और इसलिए यह विधेयक प्रायश्चित का एक आवश्यक उपाय है।
प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों से इस ऐतिहासिक विधेयक को राजनीतिक रंग न देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह सभी के लिए और देश के लोकतंत्र के लिए लाभकारी होगा। श्री मोदी ने कहा कि इस विधेयक का विरोध करने वालों को भविष्य में इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश की दिशा और भविष्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आगे उन्होंने कहा कि एक विकसित भारत केवल बुनियादी ढांचे, रेलवे या आर्थिक संकेतकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें महिलाओं की समान भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार नीति निर्माण में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के साथ काम कर रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी केवल संख्या की बात नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि लगभग छह हजार सात सौ ब्लॉक पंचायतों में से लगभग दो हजार सात सौ पंचायतों का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। श्री मोदी ने कहा कि आज देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है और इसमें महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि इस कानून को लागू करते समय किसी भी राज्य के साथ कोई अन्याय नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अतीत में किये गये परिसीमन और अपनाये गये अनुपात अपरिवर्तित रहेंगे।
चर्चा के दौरान हस्तक्षेप करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में कमी आने की विपक्ष की आशंकाओं को खारिज किया। श्री शाह ने कहा कि प्रस्तावित ढांचा दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में वृद्धि सुनिश्चित करता है। श्री शाह ने कहा कि वर्तमान में 543 सीटों में से सदन में दक्षिणी राज्यों की संख्या 129 है जो बढ़कर 195 हो जाएगी।
इससे पहले दिन में विधि और न्याय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 और परिसीमन विधेयक-2026 पेश किया। गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक-2026 पेश किया।
विधेयकों को पेश करते हुए श्री मेघवाल ने इस दिन को ऐतिहासिक बताया और कहा कि सरकार महिलाओं को राजनीतिक न्याय दिलाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026, महिलाओं के लिए समानता सुनिश्चित करेगा। डॉ. बी.आर. आम्बेडकर का हवाला देते हुए मेघवाल ने कहा कि किसी समुदाय की प्रगति का आकलन महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति के स्तर से किया जाता है। विधि और न्याय मंत्री ने कहा कि देश भर में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का एक समान और कानूनी रूप से सुसंगत वितरण लागू करने के लिए लोकसभा में सीटों की कुल संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि करना आवश्यक होगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही लोकसभा सदस्यों की संख्या 815 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो मौजूदा आवंटन के अतिरिक्त हैं।
श्री मेघवाल ने कहा कि जनगणना-2027 के परिणाम वर्ष 2028 की शुरुआत से पहले आने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने बताया कि इसलिए, क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्व्यवस्थापन या विभाजन तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों के आवंटन के लिए 2011 की जनगणना का उपयोग किया जाएगा।
चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन इसे सरल बनाया जाना चाहिए और परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण को लागू करने में अनावश्यक देरी कर रही है और सरकार से इसे तुरंत लागू करने का आग्रह किया।
चर्चा के दौरान कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिला आरक्षण का प्रावधान सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने लागू किया था। उन्होंने कहा कि यह कदम जमीनी स्तर पर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार के महिला आरक्षण कानून के कार्यान्वयन को भविष्य के परिसीमन से जोड़ने के निर्णय पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि सीटों की संख्या बढ़ाए बिना सरकार वर्तमान 543 लोकसभा सीटों के साथ महिलाओं के लिए आरक्षण तुरंत क्यों लागू नहीं कर सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जाति जनगणना न कराकर और 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर अड़े रहकर ओबीसी के अधिकारों को छीनना चाहती है।
भाजपा के तेजस्वी सूर्या ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है क्योंकि देश की महिलाएं लगभग चार दशकों से इसका इंतजार कर रही थीं। उन्होंने कहा कि पहली बार देश की नारी शक्ति को राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया में मुखर, प्रत्यक्ष, विश्वसनीय और ठोस प्रतिनिधित्व मिलेगा।
चर्चा में भाग लेते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है। उन्होंने इतने महत्वपूर्ण विधेयक को जल्दबाजी में लाने पर सवाल उठाया। श्री यादव ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक नवीनतम जनगणना पूरी होने के बाद ही पेश किया जाना चाहिए। तेलुगु देशम पार्टी की नेता डॉ. बायरेड्डी शबरी ने कहा कि आज महिलाएं राष्ट्रीय स्तर तक देश का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से लाए गए इस महत्वपूर्ण विधेयक के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया।
शिवसेना-यूबीटी के अरविंद सावंत ने कहा कि उनकी पार्टी परिसीमन विधेयक का विरोध करती है क्योंकि यह संविधान के विरुद्ध है और संघीय ढांचे को भी नुकसान पहुंचाता है।
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने परिसीमन विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि परिसीमन प्रक्रिया एक संवैधानिक प्रक्रिया है, न कि भाजपा का एजेंडा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करना है।
त्रतृणमूल कांग्रेस की प्रतिमा मंडल ने महिलाओं के लिए प्रस्तावित 33 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग की। इसके अलावा, भाजपा की डॉ. डी. पुरंदेश्वरी, आरजेडी के अभय कुमार सिन्हा, आईयूएमएल के ई.टी. मोहम्मद बशीर, सीपीआई के के. सुब्बारायण, आप के मालविंदर सिंह कंग, जनसेना पार्टी के तंगेला उदय श्रीनिवास, कांग्रेस के मनीष तिवारी और झारखंड मुक्ति मोर्चा की जोबा मांझी भी चर्चा में हिस्सा लिया।

















