नई दिल्ली। भारत और खाड़ी सहयोग परिषद ने मुक्त व्यापार समझौते की औपचारिक वार्ता शुरू करने के लिए संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए। यह कदम दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और जीसीसी के महासचिव जसीम मोहम्मद अलबुदैवी ने आज नई दिल्ली में इस संयुक्त बयान पर दस्तखत किए। यह बयान 5 फरवरी 2026 को हस्ताक्षरित संदर्भ शर्तों पर आधारित है, जो वार्ताओं के दायरे, संरचना और प्रक्रिया को परिभाषित करता है।
पीयूष गोयल ने कहा, “यह संयुक्त बयान और पहले हस्ताक्षरित भारत-जीसीसी संबंधों में एक बड़ा पड़ाव है। साझा इतिहास, सांस्कृतिक जुड़ाव और आर्थिक पूरकता के आधार पर यह व्यापक मुक्त व्यापार समझौता दोनों पक्षों को नई गति देगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में मजबूत व्यापारिक व्यवस्था स्थापित करने का यह सबसे सही समय है।”
जीसीसी महासचिव जसीम अलबुदैवी ने जोर दिया कि प्रस्तावित समझौता “व्यवसायों को पूर्वानुमान और निश्चितता प्रदान करेगा, जिससे भारत और जीसीसी देशों के बीच व्यापार-निवेश संबंध और मजबूत होंगे।” उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण उपकरण बताया जो आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा।
जीसीसी (सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन) भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार समूह है। वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 178.56 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें भारत का निर्यात 56.87 अरब डॉलर और आयात 121.68 अरब डॉलर रहा। यह भारत के कुल वैश्विक व्यापार का 15.42% है। पिछले पांच वर्षों में व्यापार में औसतन 15.3% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। जीसीसी की संयुक्त अर्थव्यवस्था वर्तमान कीमतों पर 2.3 ट्रिलियन डॉलर की है (वैश्विक स्तर पर 9वां स्थान) और बाजार आकार 6.15 करोड़ लोगों का है। सितंबर 2025 तक भारत को जीसीसी से संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 31.14 अरब डॉलर से अधिक मिल चुका है। क्षेत्र में करीब 1 करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं, जो आर्थिक और सांस्कृतिक पुल का काम करते हैं।
वार्ताएं वस्तुओं के व्यापार, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, सेवाओं, डिजिटल व्यापार, उभरती प्रौद्योगिकियों और निवेश प्रवाह जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा, निर्यात विविधीकरण और मध्य पूर्व के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगा, साथ ही जीसीसी देशों को भारत के विशाल बाजार और तकनीकी क्षमता का लाभ मिलेगा।
मजबूत दोस्ती, बड़ा व्यापार: दिल्ली में हुआ ऐतिहासिक करार, खाड़ी देशों के साथ होगा सीधा कारोबार
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