10.2 C
Dehradun
Wednesday, January 21, 2026


ऑक्सीजन प्लांट में तकनीकी खराबी, अस्पताल में मचा हड़कंप; तीन गंभीर मरीजों की मौत

जालंधर। सिविल अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट में तकनीकी फॉल्ट आने के कारण तीन गंभीर मरीजों की मौत हो गई। तीनों मरीज तीन दिन से ट्रामा के आइसीयू में दाखिल थे। दो गंभीर मरीज फेफड़ों की समस्या व एक मरीज ड्रग ओवरडोज के तौर पर दाखिल थे।
तीनों मरीजों को ऑक्सीजन लगी हुई थी। रविवार को शाम अचानक अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट में तकनीकी खराबी आने से हड़कंप मच गया। ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने के साथ तीनों मरीजों की सांस उखड़नी शुरु हो गई। अस्पताल प्रबंधन व स्टाफ को पता चला तो तुरंत दूसरा ऑक्सीजन प्लांट को चलाया गया।
ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने के बाद मौजूदा स्टाफ ने आक्सीजन कंसंट्रेटर के माध्यम से ही मरीजों को आक्सीजन देने की कोशिश की लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। जब दूसरा ऑक्सीजन प्लांट चलाया गया तब तक ऑक्सीजन ना मिलने की वजह से मौत हो चुकी थी। सिविल अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी नहीं है।
सिलेंडर के साथ-साथ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी मौजूद है। मरीजों को आक्सीजन लगी हुई थी। बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन प्लांट में लीकेज की बात सामने आ रही है। सोमवार को स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि प्लांट में तकनीकी खराबी आई है या फिर किसी प्रकार की लीकेज थी। मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने एंक्वायरी कमेटी बना दी गई है।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. राज कुमार ने कहा कि आक्सीजन प्लांट में पांच से दस मिनट की तकनीकी खरा्बी आई थी। अस्पताल में तीन गंभीर मरीज दाखिल थे। जिन्हें आक्सीजन लगी हुई थी। तीन दिन से मरीज पहले ही गंभीर चल रहे थे। कुछ मिनटों में आक्सीजन सप्लाई बंद होने के बाद दूसरा प्लांट चलाया गया था। सप्लाई शुरु हो गई थी।
अस्पताल में आक्सीजन की कमी नहीं है। मरीजों को आक्सीजन कंसट्रेटर से आक्सीजन दी गई थी लेकिन मरीजों को बचाया नहीं जा सका है। इस मामले की जांच को लेकर इंक्वायरी कमेटी बैठा दी गई है।
अगर अगर प्लांट में तकनीकी खराबी आना सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। क्या प्लांट की समय समय पर चेकिंग हो रही थी। क्या सिलेंडर बदलने के समय नोजल चेक समय-समय पर हो रही थी। अब इन सवाल इंक्वायरी कमेटी में उठ सकते है।
क्या पाइपलाइन ब्लाक हो गई थी। कौन सी कंपनी का प्लांट लगा है। अगर तकनीकी खराबी आई क्या कंपनी जिम्मेवार होगी या नहीं। कोरोना काल की बात करें तो प्लांट की देखरेख बेहतर ढंग से की जाती थी। लापरवाही कहां से हुई। यह सिविल अस्पताल के सामने सवाल खड़े होते है।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

भाजपा अध्यक्ष बनते ही चुनावी मोड में आए नितिन नवीन; कई राज्यों के चुनाव...

0
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पद संभालते ही संगठन को सीधे चुनावी मोड में डाल दिया है।...

अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स बोलीं: दुनिया में चल रही ‘स्पेस रेस’, लक्ष्य है चांद...

0
नई दिल्ली: प्रसिद्ध अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने कहा है कि इस समय दुनिया में एक तरह की ‘स्पेस रेस’ जरूर चल रही...

बांग्लादेश के हालात और बिगड़ेंगे?: भारत का बड़ा फैसला, अधिकारियों के परिवारों को वापस...

0
नई दिल्ली। कूटनीतिक तनातनी के बीच भारत ने सुरक्षा कारणों से बांग्लादेश को नॉन फैमिली श्रेणी में डाल कर वहां विभिन्न मिशनों में तैनात...

भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन की पहली बड़ी बैठक, विकसित भारत बनाने...

0
नई दिल्ली। नितिन नवीन को 20 जनवरी को औपचारिक तौर पर भाजपा का नया अध्यक्ष घोषित कर दिया गया है। इसके साथ ही भाजपा...

“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान ने रचा नया कीर्तिमान, मुख्यमंत्री धामी के...

0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल, संवेदनशील और परिणामोन्मुख नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश...