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Sunday, September 6, 2026


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आतंकवाद विकास के लिए स्थायी खतरा: विदेश मंत्री एस. जयशंकर

न्यूयॉर्क : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि आतंकवाद विकास के लिए एक स्थायी खतरा बना हुआ है। विश्व समुदाय को इसके प्रति न तो सहिष्णुता दिखानी चाहिए और न ही कोई रियायत देनी चाहिए। उन्होंने यह बात संयुक्त राष्ट्र में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए कही। जयशंकर ने कहा कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय शांति और वैश्विक विकास, दोनों ही समानांतर रूप से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा, विकास के लिए सबसे बड़ा व्यवधान आतंकवाद है। यह आवश्यक है कि दुनिया इसके प्रति कोई समझौता न करे। उन्होंने कहा कि जो भी देश या संगठन आतंकवाद के खिलाफ किसी भी मोर्चे पर कदम उठाते हैं, वे केवल अपने लिए ही नहीं बल्कि संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सेवा करते हैं। जयशंकर ने कहा कि जब दुनिया एक साथ संघर्ष, आर्थिक दबाव और आतंकवाद से जूझ रही है, तब बहुपक्षीय व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र की सीमाएं स्पष्ट दिखाई देती हैं। ऐसे में बहुपक्षीय सुधार की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
उन्होंने कहा, आज की अंतरराष्ट्रीय स्थिति राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टि से अस्थिर है। जी-20 सदस्य होने के नाते हमारी विशेष जिम्मेदारी है कि हम स्थिरता को मजबूत करें और इसे सकारात्मक दिशा दें। यह काम संवाद और कूटनीति, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, तथा ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने से ही संभव है।
विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि यूक्रेन और गाजा युद्ध ने वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) पर गंभीर असर डाला है। ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति शृंखलाएं और लॉजिस्टिक्स बाधित हुए हैं, जिससे न केवल उपलब्धता बल्कि लागत भी कई देशों के लिए बड़ा दबाव बन गई है। जयशंकर ने दोहरे मानदंडों पर भी सवाल उठाए और कहा कि शांति विकास को संभव बनाती है, लेकिन विकास को बाधित करना शांति की राह नहीं खोल सकता।
विदेश मंत्री ने कहा कि ऊर्जा और अन्य आवश्यक वस्तुओं को और अधिक अनिश्चित बनाना, खासकर आर्थिक रूप से नाजुक हालात में, किसी के हित में नहीं है। उन्होंने दुनिया से अपील की कि संघर्षों को और जटिल बनाने की बजाय संवाद और कूटनीति की ओर कदम बढ़ाए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी संघर्ष में कुछ देश ऐसे होते हैं, जिनके पास दोनों पक्षों से संवाद करने की क्षमता होती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे देशों का उपयोग शांति स्थापित करने और बनाए रखने में करना चाहिए। जयशंकर ने अंत में कहा कि जटिल खतरों से निपटने के लिए उन देशों और समाजों को साथ लाना होगा जो शांति और विकास के साझा लक्ष्य का समर्थन करते हैं।
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