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Saturday, September 5, 2026


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केंद्र सरकार ने कैंपा की प्रस्तावित 439.50 करोड़ की कार्ययोजना को दी मंजूरी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय कैंपा की कार्यकारी समिति की बैठक में उत्तराखण्ड़ राज्य की रुपये 439.50 करोड़ की कार्य योजना को शत प्रतिशत मंजूरी दिये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रीय कैम्पा की कार्यकारी समिति की बैठक में उत्तराखंड के अवशेष प्रस्तावों पर विचार किया गया तथा सभी को स्वीकृति प्रदान की गई। कैम्पा की राष्ट्रीय  समिति ने पाया कि उत्तराखंड के द्वारा प्रस्तावित सभी कार्य मानकों के अनुरूप थे तथा उनसे संबंधित समस्त अपेक्षित विवरण भी समिति के समक्ष स्पष्टता से प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार इस वर्ष राज्य हित में कैम्पा के अंतर्गत एक बड़ी धनराशि विभिन्न कार्यों के लिए समय से उपलब्ध हो सकेगी। उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. समीर सिन्हा ने बैठक में प्रतिभाग कर अवगत कराया कि यह प्रथम अवसर है जब राज्य द्वारा प्रस्तावित वार्षिक योजना को पूरी तरह स्वीकृति मिली है।
ज्ञातव्य है कि वर्ष 2025-26 के लिए उत्तराखंड राज्य कैम्पा की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित संचालन समिति ने 439.50 करोड रुपए की कार्य योजना अनुमोदित कर भारत सरकार को स्वीकृति हेतु प्रेषित की थी। प्रथम चरण में इसके सापेक्ष भारत सरकार द्वारा 235.30 करोड़ रुपए की धनराशि की स्वीकृति मई 2025 में जारी की गई थी। इसके सापेक्ष राज्य सरकार द्वारा वन विभाग को प्रथम किश्त की धनराशि भी जारी कर दी गई है। प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने भी इस हेतु डॉ समीर सिन्हा की अगुवाई में उत्तराखंड कैंपा की पूरी टीम को बधाई देते हुए यह अपेक्षा की है कि उत्तराखंड वन विभाग इस धनराशि से राज्य हित में निर्धारित  समय एवं मानकों के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन करेगा। मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखण्ड कैम्पा ने बताया कि प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि अधिनियम 2016 के अन्तर्गत स्थापित उत्तराखण्ड प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कैम्पा) के तहत प्रदेश को वर्ष 2023-24 में 424.46 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्योजना के सापेक्ष 383.25 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई, वर्ष 2024-25 में 408 करोड़ रुपए की वार्षिक कार्ययोजना के सापेक्ष 369.25 करोड़ रुपये की स्वीकृति भारत सरकार से प्राप्त हुई थी।

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