नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के कपास क्षेत्र में बाधाओं, घटती वृद्धि और गुणवत्ता संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए पांच हजार छह सौ 59 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ कपास उत्पादकता मिशन कपास कांती को मंजूरी दे दी है। नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह मिशन सरकार के 5-एफ विजन (खेत से रेशा, रेशे से कारखाने, कारखाने से फैशन और फैशन से विदेश तक) के अनुरूप है। यह कपास उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित है। इस योजना से लगभग 32 लाख कपास किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे वर्ष 2030-31 तक कपास उत्पादन बढ़कर 498 लाख गांठ तक पहुंचने की संभावना है। इससे आयातित कपास पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा की बचत करने में भी मदद मिलेगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आपातकालीन ऋण गारंटी योजना के पांचवें चरण को भी मंजूरी दे दी है। इस योजना के अंतर्गत, सुक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सौ प्रतिशत ऋण गारंटी प्रदान की जाएगी, जबकि गैर-सुक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों और एयरलाइन क्षेत्र को 90 प्रतिशत गारंटी दी जाएगी।
कैबिनेट ने वर्ष 2026-27 चीनी सीजन के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य तीन सौ 65 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। यह दस दशमलव दो-पांच प्रतिशत की मूल वसूली दर पर आधारित है। श्री वैष्णव ने कहा कि इस निर्णय से लगभग पांच करोड़ गन्ना किसानों के साथ-साथ चीनी मिलों में कार्यरत लगभग पांच लाख श्रमिकों को लाभ मिलेगा।
केंद्रीय कैबिनेट ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अंतर्गत दो और सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इनमें गैलियम नाइट्राइड तकनीक पर आधारित देश की पहली वाणिज्यिक मिनी -माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले सुविधा और एक सेमीकंडक्टर पैकेजिंग सुविधा शामिल है। श्री वैष्णव ने कहा कि स्वीकृत प्रस्तावों से गुजरात में सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयां स्थापित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से लगभग दो हजार दो सौ 30 कुशल पेशेवरों के लिए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।















