नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10,000 करोड़ रुपये के ‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0’ को मंजूरी दी है। इसका लक्ष्य डीप टेक, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को दीर्घकालिक पूंजी देकर नवाचार, रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
इस फंड का विशेष फोकस डीप टेक, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और शुरुआती चरण के संस्थापकों पर रहेगा, ताकि नवाचार को शुरुआती वित्तीय कमी के कारण रुकना न पड़े।
यह योजना 2016 में शुरू किए गए पहले फंड ऑफ फंड्स के दूसरे चरण के रूप में लाई गई है। सरकार के अनुसार, पहले चरण में 10,000 करोड़ रुपये के पूरे कोष को विभिन्न निवेश फंड्स के माध्यम से तैनात किया गया।
इनके जरिए 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स को समर्थन मिला और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थकेयर तथा स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में 25,500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ। सरकार ने कहा कि फंड ऑफ फंड्स 2.0 का प्रमुख उद्देश्य डीप टेक और नवोन्मेषी विनिर्माण जैसे लंबे समय में विकसित होने वाले क्षेत्रों को ‘लंबी अवधि की धैर्यपूर्ण पूंजी’ उपलब्ध कराना है। इन क्षेत्रों में जोखिम अधिक होने के कारण निजी निवेशक अक्सर निवेश से बचते हैं, जिससे उच्च-जोखिम पूंजी की कमी बनी रहती है।
नई योजना का एक अहम लक्ष्य निवेश को केवल बड़े स्टार्टअप हब जैसे बंगलूरू या दिल्ली तक सीमित न रखकर देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाना भी है, ताकि नवाचार का दायरा व्यापक हो सके और घरेलू दीर्घकालिक पूंजी को बढ़ावा मिले। इससे विदेशी निवेश पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2016 से अब तक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 500 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो चुकी है। सरकार का मानना है कि यह नया फंड आर्थिक मजबूती, विनिर्माण क्षमता में वृद्धि और उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा व 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को गति देगा।
केंद्र ने स्टार्टअप इंडिया फंड को दी मंजूरी, ₹10000 करोड़ की मदद से इन क्षेत्रों को मिलेगा बढ़ावा
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